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बांध को भी नहीं छोड़ा, तेरह करोड़ की जमीन पर कब्जा

7 वर्ष पहले
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दिलबर मानिकपुरी - भिलाई
जमीन कारोबारियों द्वारा अवैध कब्जा करने की शिकायतें तो सामने आती ही रहती हैं, पर भिलाई-3 के जमीन कारोबारियों ने इसकी सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने ज्यादा जमीन हथियाने के लिए स्टाप डेम के पार को ही काट डाला और उसे दूसरी तरफ मोड़ दिया। इससे बांध का आकार छोटा होकर दो तिहाई ही रह गया है। जमीन कारोबारी बांध की नहर को भी पाट चुके हैं। हथियाए गई जमीन की कीमत करीब 13 करोड़ है।
भास्कर ने नहर पाटने को लेकर 19 जनवरी को पाट दी नहर और बेच दी जमीन शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। यह जानने के लिए इस पर क्या कार्रवाई हुई, सोमवार को जब भास्कर रिपोर्टर मौके पर पहुंचा और उसका बारीकी से अवलोकन किया तो स्टाप डेम के पार काटे जाने का पता चला। इसकी पुष्टि आसपास के रहवासियों और सिंचाई विभाग के एसडीओ टीआर मेश्राम ने भी की। आसपास के लोगों ने बताया कि नहर माहभर पहले पाटा गया था, बांध का पार भी लगभग उसी दौरान काटा गया। पहले बांध का पार दक्षिण से उत्तर की दिशा का ओर था जिसे मोड़कर पूर्व दिशा से पश्चिम की ओर कर दिया। अब पार खेत के बीच से हटकर स्टाप डेम के नाले के किनारे आ गया और खेत, जिस पर प्लाट काटने की तैयारी थी, यहां से वहां तक एक ही और समतल हो गया। खेत राजरानी सिंह के नाम पर है। उन्हीं के खेत पर सिंचाई विभाग की नहर है।




हां.. कब्जा हुआ है

॥भिलाई-3 में स्टाप डेम की नहर पाटे जाने के मामले में मौके का जब दोबारा मुआयना किया गया तो बांध के पार को भी काटे जाने की जानकारी मिली है। पार को मोड़ भी दिया गया है। इसके कारण अब डूबान क्षेत्र नहीं रहा। माना जाए कि इस पर अवैध कब्जा किया जा रहा था।ञ्जञ्ज

टीआर मेश्राम, एसडीओ, सिंचाई विभाग

नोटिस केवल नहर के मामले में कैचमेंट एरिया हड़पने पर नहीं

खेत मालिकों को अभी तक विभाग की ओर से नोटिस केवल नहर पाटने के ही मामले में दिया गया है। स्टाप डेम के पार और डूबान क्षेत्र पार काटने के लिए नहीं। भास्कर में नहर पाटने की खबर छपने के बाद सिंचाई विभाग ने आसपास के खेत मालिकों को नोटिस जारी किया था। 21 जनवरी को पेशी दी थी। एसडीओ टीआर मेश्राम के अनुसार खेत मालिक पहली पेशी में उपस्थित नहीं हो पाए। बाद में राजरानी की ओर से जवाब दिया गया है कि वे एक सप्ताह में जमीन से संबंधित विस्तृत जानकारी उपलब्ध करवाएंगे।



६३ हजार वर्गफीट पर अतिक्रमण

यदि कुल अवैध कब्जा पौने चार एकड़ पर माना जाए तो यह करीब एक लाख 63 हजार 125 वर्गफीट जमीन होगी। यहां जमीन की कीमत आठ सौ रुपए प्रति वर्गफीट बताई जा रही है। इस हिसाब से यह करीब 13 करोड़ पांच लाख रुपए की जमीन होगी।

पौने चार एकड़ पर अवैध कब्जा

कारोबारियों ने नहर, स्टाप डेम का पार और डूबान क्षेत्र को मिलाकर कुल पौने चार एकड़ पर अवैध कब्जा किया है। नहर पौन एकड़ पर है और पार व डूबान एरिया करीब तीन एकड़ पर। पार काटने और उसे दूसरी तरफ मोडऩे के बाद अब डूबान एरिया ही नहीं रहा। इस पर अवैध कब्जा हो गया है। राजस्व विभाग के रिकार्ड में न तो नहर का उल्लेख है और न स्टाप डेम के पार का। केवल सिंचाई विभाग का भूखंड होने का उल्लेख है। लेकिन सिंचाई विभाग के रिकार्ड में नहर दर्ज है।

भिलाई-३ में स्टामपडेम का पार यहीं पर था। जिसे काटकर समतल कर दिया गया है। इसी के दांए साइड पर कैचमेंट एरिया है। बांध का आकार अब दो तिहाई ही रह गया है।

लगभग ११ एकड़ का बांध... एक तिहाई पर कब्जा

अतिक्रमण का खेल - भिलाई तीन के जमीन कारोबारियों का कारनामा