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शासन से मांगी मदद, नहीं मिली तो खुद बिछा ली पाइपलाइन
उमेश निवल - भिलाई
दो हजार की आबादी वाला ग्राम गुरेदा। गांव तांदुला नदी के किनारे लेकिन ग्रामीण फ्लोराइड युक्त पानी पीने के लिए मजबूर। बच्चे-बड़े-बूढ़े-महिलाएं तक दांत व हड्डी से संबंधित रोग डेंटल फ्लोरोसिस और स्क्लेटल से ग्रसित। पीएचई के अफसरों से कई बार गुहार लगाई लेकिन कोई मदद नहीं मिली। तब ग्रामीणों ने अपने स्तर पर ही काम करने की ठानी। चंदा किया। फंड इकट्ठा किया। बोर करवाया। पानी सप्लाई के लिए पूरी पाइपलाइन बिछा डाली। अब पूरा गांव साफ पानी पी रहा है। गांव वालों के इस भागीरथ प्रयास के बाद शासन हरकत में आया। फिलहाल वह भी प्रस्ताव भेजे जाने तक ही आगे बढ़ पाया है।
जानकारी के मुताबिक गुरेदा के ग्रामीण हैंडपंप के पानी का इस्तेमाल कर रहे थे। जिसमें फ्लोराइड की मात्र निर्धारित मापदंड 1.50 मिलीग्राम से कहीं अधिक है। जानकारी के अभाव में किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। पांच वर्ष पूर्व गांव में स्वास्थ विभाग का शिविर लगा। उसमें चिकित्सकों ने फ्लोराइडयुक्त पानी का ग्रामीणों के स्वास्थ पर पड़े रहे दुष्प्रभाव से अवगत कराया। तब गांव के लोगों ने दूषित पानी से निजात पाने लोक स्वास्थ यांत्रिकी विभाग ((पीएचई)) से संपर्क किया। दो साल तक विभागीय दफ्तर के चक्कर लगाने पर भी मदद नहीं मिली तो ग्रामीणों ने अपने स्तर पर योजना तैयार की। वर्ष 2008 में ग्राम विकास समिति का गठन कर हर घर से रकम जुटाई गई। चंदे में करीब तीन लाख रुपए जमा हुए। बोर कराया। तीन साल से लगातार पानी की सप्लाई कर रहे।
पांच साल से इंतजार
॥ग्रामीणों की मांग के बाद शासन को करीब 15 लाख के दो प्रस्ताव भेजे गए हैं। जिसे अब तक मंजूरी नहीं मिली है।ञ्जञ्ज
एके साह, एसई, पीएचई दुर्ग
॥पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था करने दो साल तक पीएचई दफ्तर के चक्कर काटे। विभाग से मदद नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने चंदा कर रकम जुटाई पाइपलाइन से पानी सप्लाई की व्यवस्था की।ञ्जञ्ज
रामसागर सिन्हा, उपाध्यक्ष, जनपद पंचायत गुंडरदेही
ग्रामीणों द्वारा अपने स्तर पेयजल की व्यवस्था करते देख पीएचई विभाग के अधिकारी हरकत में आए। उन्होंने करीब 15 लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा, लेकिन उसे अब तक मंजूरी नहीं मिली है। पीएचई ने दो रिंग वेल किए जो पांच साल बाद भी पूरा नहीं है।
तीन साल पहले तांदुला नदी के किनारे कराया गया बोर।
पांच वर्ष पूर्व तक गांव में फ्लोराइडयुक्त पानी पीने से 30 से अधिक लोग दांत व हड्डी के रोग से पीडि़त हैं। इनमें से तीन की तो मौत भी हो चुकी है। हाल ही सुकली बाई के बेटे मनोज देशलहरे की भी इसी बीमारी के चलते मौत हुई। सुकली बाई खुद भी बीमारी से पीडि़त है। लेकिन राहत की बात यह है कि जब से गांव में नदी से पानी की सप्लाई की जा रही है हड्डी संबंधी नए केस सामने आना बंद हो गए।
तीन साल से कोई बीमार नहीं
अब तक गांव में 50 निजी कनेक्शन व 15 सार्वजनिक कनेक्शन दिए जा चुके हैं। जहां सुबह व शाम दो-दो घंटे पानी सप्लाई की जाती है। पंप को आपरेट करने के लिए समिति ने 1500-1500 रुपए मासिक वेतन में दो आपरेटर रखे हैं। निजी कनेक्शन के 50 रुपए व सार्वजनिक कनेक्शन के 15 रुपए महीने के हिसाब से पानी टैक्स लिया जाता है। प्राप्त रकम से ऑपरेटरों को वेतन का भुगतान किया जाता है। फिलहाल समिति के पास करीब 6 लाख रुपए जमा है। जिसका इस्तेमाल जरूरतमंदों को बिना ब्याज व ग्रामीणों को दो प्रतिशत की ब्याज दर से रकम उपलब्ध कराई जाती है। प्रत्येक होली में समिति का ऑडिट किया जाता है।
50 और 15 रुपए पानी टैक्स