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ग्रामीणों के चंदे से 12 साल से चल रहा है हाईस्कूल
पुनीत कौशिक - दुर्ग
ग्राम तरीघाट में 12 साल से हाईस्कूल गांव वालों के चंदे से संचालित हो रहा है। गांव की लड़कियों को शिक्षा देने के उद्देश्य से इस स्कूल का संचालन 2002 में शुरू किया गया। तरीघाट में आठवीं तक शासकीय स्कूल है। गांव के सरपंच चोवाराम सिन्हा बताते हैं कि आठवीं पास होने के बाद आगे की पढ़ाई की समस्या आती थी। लड़कियों को पढ़ाई छोडऩा पड़ता था। क्योंकि तरीघाट के आसपास एक भी हाई स्कूल नहीं है। पाटन व सिपकोन्हा में हाई स्कूल है। इसकी वजह से कई लड़के भी आठवीं के बाद आगे नहीं पढ़ पाते थे। इसी बात को लेकर ग्रामीणों ने हाईस्कूल संचालित करने का निर्णय लिया। पहले वर्ष तो नवमी व दसवीं कक्षा को मिलाकर 38 बच्चे थे। हर साल दर्ज संख्या बढ़ती गई। तरीघाट के आसपास के गांव सोनपुर, परसुलीडीह, लमकेनी के बच्चे भी आने लगे। इस साल चारों गांव के 195 बच्चे इस हाईस्कूल में पढ़ रहे हैं। जिनमें आधी संख्या लड़कियों की है।
हाईस्कूल शासकीय मिडिल स्कूल के भवन में लगता है। भवन के रुप में यही सरकारी सहायता है। इसके अलावा और किसी तरह की शासकीय सहायता नहीं मिलती। हाईस्कूल संचालन के लिए सालाना करीब दो लाख रुपए ग्रामीणों को अपने संसाधनों से जुटाना पड़ता है।
॥तरीघाट में ग्रामीण 12 साल से जनभागीदारी से हाई स्कूल संचालित कर रहे हैं। ग्रामीणों का प्रयास प्रशंसनीय है। हाई स्कूल को शासकीय घोषित करने के लिए प्रयास किया जाएगा।ञ्जञ्ज
अजय चंद्राकर, पंचायत एवं ग्रामीण विकास व पर्यटन एवं संस्$कृति मंत्री
दूसरे चरण की पुरातात्विक खुदाई के लिए 19 जनवरी को संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री अजय चंद्राकर व सांसद सरोज पांडेय ने भूमि पूजन किया। इस मौके पर ग्रामीणों ने दोनों जनप्रतिनिधियों को हाईस्कूल को शासकीय करने के लिए मांगपत्र सौंपा है।
दूसरे चरण की खुदाई जारी
पुरातात्विक खुदाई से चर्चा में है गांव
यह वही तरीघाट गांव है जहां पुरातात्विक खुदाई की जा रही है। खुदाई में मिले अवशेषों को लेकर गांव चर्चा में है। खुदाई में 2000 साल पुराने कुषाण वंश के अवशेष प्राप्त हो रहे हैं।
जनभागीदारी की मिसाल : दुर्ग से ५० किमी दूर तरीघाट में एक-दूसरे का हाथ थाम विकास की नई इबारत लिख रहे हैं ग्रामीण
इस साल १९५ छात्र स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं।