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बच्चों को पढ़वाने का संकल्प पत्र भरवाते हैं शिक्षक
शिक्षा के प्रचार-प्रसार व स्कूल में दर्ज संख्या बढ़ाने हुई अनूठी पहल।
निर्मल साहू - भिलाई
ग्राम बासीन के मिडिल व प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों ने शिक्षा के प्रचार-प्रसार व बच्चों की दर्ज संख्या बढ़ाने के लिए अनूठी पहल की है।
गांव में किसी के घर संतान प्राप्ति का उत्सव हो तो स्कूल का पूरा स्टाफ छठी की बधाई देने पहुंच जाता है। 51 रुपए की स्नेह राशि भेंट कर उस दंपती से यह संकल्प पत्र भरवा जाता है कि वे अपने बच्चे को अनिवार्य रूप से पढ़ाएंगे।
सरकारी स्कूल के प्रति लोगों की धारणा बदलने के लिए यह पहल की है प्रधानपाठक रामकुमार वर्मा ने। उन्होंने जब यहां पदभार ग्रहण किया तो वे यह देखकर दंग रह गए कि साढ़े तीन हजार आबादी वाले इस गांव के स्कूल की दर्ज संख्या महज सवा सौ है। तब श्री वर्मा ने पालकों को अपने बच्चों को इसी स्कूल में ही पढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया और नवजातों के माता-पिता से संकल्प पत्र भरवाया की योजना बनाई। अब तक वे उमेश साहू, पूर्णिमा, मुकेश कुर्रे-त्रिवेणी और इंद्रजीत बंजारे-सरिता जैसी कई माता-पिता से संकल्प पत्र भरवा चुके हैं। वर्मा बताते हैं कि अब ज्यादातर बच्चे बी ग्रुप में आ चुके हैं।
निखारी जा रही हैं बाल प्रतिभाएं
बच्चों की प्रतिभा को निखारने का प्रयास किया जा रहा है। पेंटिंग, गीत संगीत, रंगोली, लोक चित्र शैलियां व खेल की भी नियमित क्लास लगती है। स्कूल प्रबंधन स्थानीय कला गुरुओं की सेवाएं भी ले रहा है। बच्चों को सामान्य ज्ञान, नीति शिक्षा भी दिया जा रहा है।
क्लब की जिम्मेदारी
स्कूल और बच्चों को साफ- सुथरा रखने की जिम्मेदारी कस्तूरबा क्लब की है। क्लब के ग्यारह बच्चों की टीम इसकी मॉनीटरिंग करती है। हर बच्चे की एक-एक गतिविधि पर उनकी नजर रहती है। रोज स्टूडेंट ऑफ द क्लास चुना जाता है। यानि हर क्लास में एक सर्वश्रेष्ठ बच्चे का चयन किया जाता है। इसका आधार अनुशासन, पहनावा और स्वच्छता है। उन्हें बैच लगाकर सम्मानित किया जाता है। इसी तरह शाम को बेस्ट क्लास का चयन कर उसे भी पुरस्कृत किया जाता है।
हर कक्षा के सामने बनती है रंगोली
स्कूल की सजावट पर भी कितना ध्यान दिया जाता है इसका अनुमान केवल इसी से लगाया जा सकता है कि छात्राएं रोज अपनी कक्षा के सामने रंगोली बनाती हैं। हर कक्षा की अपनी अलग बागवानी है। राष्ट्रगीत व राष्ट्रगान के अलावा समय-समय पर देशभक्ति गीत, भजन, प्रार्थना व श्लोक वाचन भी होता है।
बासीन का मिडिल व प्राइमरी स्कूल अन्य सरकारी स्कूलों के लिए बना मिसाल
ईमानदारी की दुकान
बच्चों में ईमानदारी का विकास करने के लिए बाकायदा प्रयोग किया जा रहा है। यह प्रयोग सफल भी रहा है। स्कूल में ईमानदारी की दुकान खोली गई है। प्रधानपाठक कक्ष के एक कोने में रंगोली, पेंटिंग व बच्चों की जरूरत की अन्य सामग्रियां कलर, ब्रश, ड्रांइग बुक रखी हैं। इसके साथ ही रेट लिस्ट भी टांग कर रखा गया है, साथ में एक गुल्लक है। बच्चों को जब जिस सामान की जरूरत होती है, वे ले आते हैं और जाते-जाते गुल्लक में पैसे डाल जाते हैं।