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६० स्कूलों में १० वीं की बोर्ड परीक्षा, १६० में इंटरनल होगा

7 वर्ष पहले
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शहर में बीएसपी स्कूल के विद्यार्थी ही बोर्ड परीक्षा देंगे
सिद्धार्थ साव - भिलाई
केंद्रिय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ((सीबीएसई)) से मान्यता प्राप्त प्रदेश के ज्यादातर स्कूल इस बार 10 वीं बोर्ड परीक्षा की बजाय इंटरनल एक्जाम लेंगे। पिछले वर्ष बारहवीं बोर्ड के परिणाम में दसवीं इंटरनल परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों का प्रदर्शन बेहतर आने से स्कूलों ने इंटरनल पद्धति अपनाने का निर्णय है। बोर्ड का मानना है कि आने वाले सत्रों में शत प्रतिशत स्कूल इस पद्धति से ही परीक्षा लेंगे।
विद्यार्थियों में बोर्ड परीक्षा का भय समाप्त करने के लिए इस वर्ष छत्तीसगढ़ के 220 सीबीएसई स्कूलों में से 160 स्कूलों ने कक्षा 10 वीं की वार्षिक परीक्षा इंटरनल लेने का निर्णय लिया है। सीबीएसई ने 2011 में अपने सभी स्कूलों में यह सुविधा लागू की थी कि वे दसवीं की वार्षिक परीक्षा बोर्ड या इंटरनल या फिर दोनों पद्धति से ले सकते हैं। जिसके बाद से हर वर्ष इंटरनल परीक्षा लेने वाले स्कूलों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होती रही है।
पहले सत्र में राज्य से 95 स्कूल ही इंटरनल परीक्षा लेने को राजी हुए थे वहीं 125 स्कूलों में दसवीं के विद्यार्थियों ने बोर्ड परीक्षा दी थी। इसके बाद सत्र 2012-13 में 120 सीबीएसई स्कूलों ने इंटरनल परीक्षा ली। यह संख्या इस सत्र में बढ़कर 160 हो गई हैं जबकि मात्र 60 स्कूलों ने ही दसवीं बोर्ड पर विश्वास जताया है। देखा जाए तो पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 25 प्रतिशत ज्यादा स्कूलों ने इंटरनल परीक्षा लेने की इच्छा जाहिर की है।




सीबीएसई: प्रदेश में बदल रहा ट्रेंड

शहर में ४८ स्कूल, १० में बोर्ड, ३८ में इंटरनल

जिले में सीबीएसई से मान्यता प्राप्त 48 स्कूल संचालित हैं। जिनमें से नंदिनी में एक, बोरई में एक तथा चरोदा के दो स्कूलों के अलावा शेष सभी स्कूल दुर्ग-भिलाई में संचालित हैं। इनमें से भी ज्यादातर स्कूलों ने दसवीं की परीक्षा इंटरनल पद्धति से लेने का निर्णय लिया है। इसके विपरीत भिलाई इस्पात संयंत्र की ओर से संचालित सभी सीबीएसई स्कूलों में विद्यार्थी दसवीं की बोर्ड परीक्षा ही दे रहे हैं। इसके पीछे बीएसपी स्कूलों के प्राचार्यों का यह मानना है कि दसवीं बोर्ड देने से विद्यार्थियों में बारहवीं बोर्ड देते वक्त भय नहीं रहता है और अगर दसवीं इंटरनल दिया जाए तो बारहवीं में आकर बच्चे नर्वस हो जाते हैं और उनका पेपर बिगड़ जाता है।

विद्यार्थियों में लगातार बढ़ रही लोकप्रियता

इंटरनल परीक्षा के प्रथम सत्र 2010-11 में दसवीं की परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों ने बारहवीं बोर्ड 2012-13 में परीक्षा दी। जिसमें 95 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वाले विद्यार्थियों में 0.9 प्रतिशत बच्चों ने दसवीं की इंटरनल परीक्षा दी थी तथा 0.6 प्रतिशत बच्चों ने दसवीं बोर्ड परीक्षा दी थी। इसी प्रकार 85 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वाले बच्चों में भी 18 प्रतिशत ने दसवी इंटरनल दिया था व 16 प्रतिशत विद्यार्थियों ने दसवी बोर्ड की परीक्षा दी थी। दसवीं की बोर्ड परीक्षा देने वालों की तुलना मे इंटरनल देने वाले विद्यार्थियों का बारहवीं में ज्यादा बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए स्कूलों व विद्यार्थियों में इंटरनल परीक्षा के प्रति रुझान बढ़ रहा है। पिछले वर्ष दसवीं बोर्ड परीक्षा लेने वाले प्रदेश के 60 स्कूलों में से भी 30 स्कूलों के 60 प्रतिशत से ज्यादा बच्चों ने इंटरनल परीक्षा देने की इच्छा जाहिर की है।

बोर्ड की तुलना में इंटरनल पैटर्न का रिजल्ट बेहतर