पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • श्मशान पर कब्जा, अफसर पहुंचे, मार्किंग कराई

श्मशान पर कब्जा, अफसर पहुंचे, मार्किंग कराई

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
सिटी रिपोर्टर - भिलाई
भू-माफिया हर शासकीय व सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा कर रहे हैं। यहां तक की श्मशान भूमि पर भी उनकी टेढ़ी नजर है। कोहका-कुरुद नाले के पास स्थित सतनामी समाज की श्मशान भूमि को हथियाने के लिए अज्ञात लोगों ने उस पर डस्ट डाल दिया है। स्थिति ये है कि यहां रोज ही कोई-न-कोई पहुंचता है जमीन को अपना बताता है। इसके कारण कई बार विवाद की स्थिति भी निर्मित हुई। आखिर में बुधवार को तहसीलदार ने आसपास की जमीनों का सीमांकन शुरू किया ताकि विवाद का निपटारा हो सके।
कोहका में पटवारी हल्का नंबर 14/19 कोहका कुरुद नाले से सटकर दर्जनभर लोगों की जमीनें हैं। नाले के बगल और नीलगिरी नर्सरी के बीच सतनामी समाज की श्मशान भूमि है। इसका खसरा नंबर 4889 है। यहां 60-70 साल से शव दफनाए जाते रहे हैं। लेकिन अवैध कब्जे के कारण दो साल से श्मशान जाने के लिए रास्ता नहीं रह गया है। श्मशान भूमि भी छोटी हो गई है। यह पहले करीब 32 अब 15-20 डिसमिल से ज्यादा नहीं दिख रही है। इसकी वजह से कई बार विवाद भी हुआ। लेकिन श्मशान भूमि कहां से कहां तक यह ठीक से पता नहीं होने के कारण समाज के लोग खास विरोध नहीं कर पाए।
सात भूमि स्वामियों को जमीन का ही पता नहीं
जमीन कारोबारी यहां कितना हावी हैं इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि यहां सात ऐसे भूमि स्वामी हैं जिन्हें ये ही नहीं पता कि उनकी जमीनें कहां है या कहां तक है। ये भू स्वामी हैं- जेपी सिंह, एनके स्वार, युवराज सिंह, प्रकाश चंद्र जायसवाल, एम रहमान, धर्मेंद्रसिंह, कुसुम सिंह। उन्होंने भी प्रशासन को जमीन के सीमांकन के लिए आवेदन दिया था। बुधवार को तहसीलदार मधु हर्ष देवांगन तीन आरआई और सात पटवारियों के साथ सीमांकन करने पहुंची।



दूसरे गांव में क्रिया-कर्म

समाज के लोगों ने बताया कि अवैध कब्जे के कारण ही चार से साल से यहां शव दफन नहीं किए जा रहे हैं। शव को या तो दूसरा गांव ले जाना पड़ता है या गांव में ही कहीं भी दफन करना पड़ता है। प्रशासन से इसकी कई बार शिकायत की लेकिन वह पहले ध्यान ही नहीं दे रहा था।

समाधि पाट दी

भिलाई बचाओ आंदोलन के संयोजक बृजमोहन सिंह और सतनामी समाज के नेमी चंद कौशल, रामचंद लहरे, हरीराम लहरे, संतोष बंजारे, किरण बघेल, बेहरलाल, रेवाराम डहरिया ने दावा किया कि अवैध कब्जाधारियों ने चोरी छुपे सौ से ज्यादा समाधि पाट दी है। वहां डस्ट डाले जाने के कारण ये भी पता नहीं चल रहा है कि कहां-कहां समाधियां थीं।



ञ्चक्या उन लोगों को चिन्हित किया जाएगा जो अपनी जमीन हक से ज्यादा बताते रहे हंैं, क्या उन पर कोई कार्रवाई होगी?

ञ्चञ्चकार्रवाई तो न्यायालयीन प्रक्रिया है। रहा सवाल अपनी जमीन हक से ज्यादा बताने वाले को चिन्हित करने का तो पहले कोई कुछ भी कहता रहा हो, पर अभी तो कोई ऐसा दावा नहीं कर रहा है।अगर कोई करता है तो खुद ही चिन्हित हो जाएगा।

ञ्चयानि सीमांकन के बाद कोई कार्रवाई नहीं होने वाली है, ये तो तय है न कि अतिक्रमण हुआ है या किया जा रहा था, वर्ना श्मशान में आखिर कोई क्यों डस्ट डालेगा? फिर लोगों को ये भी शिकायत है कि उनकी जमीन का ठीक से पता नहीं चल रहा है। ये क्यों है, अवैध कब्जा के कारण ही है न ऐसा?

ञ्चञ्चलोगों ने वर्ष 91-92 में जमीनें ली हैं। इतने दिन तक उन्होंने क्यों शिकायत नहीं की। ऐसे मामलों में खुद ही जागरूक होना होता है।

ञ्चइस मामले में तो कई बार शिकायत भी की गई थी?

ञ्चञ्चशिकायत पर ही तो कलेक्टर साहब के निर्देश पर सीमांकन कार्रवाई की जा रही है।

ञ्चलेकिन आधी अधूरी, अवैध कब्जा करने वालों पर तो कोई कार्रवाई नहीं हो रही है?

ञ्चञ्चजैसी शिकायत होगी, कार्रवाई भी वैसी होगी।

कोहका में श्मशान की जमीन पर सीमांकन करने के लिए पहुंचा प्रशासनिक अमला।

भू-माफिया सक्रिय - चार साल से जमीन पर डाल रहे थे डस्ट

मधु हर्ष देवांगन, तहसीलदार

सीधी बात