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डाउनलोड करेंदुर्ग। आदित्य नगर व जवाहर नगर कॉलोनियों के बीच भारी-भरकम उपकरण बनाने का कारखाना संचालित हो रहा है। कारखाने में सड़क निर्माण के उपयोग में आने वाले उपकरण बनाए जा रहे हैं। उपकरण बनाने के दौरान कारखाने से दिनभर तेज शोर गूंजता रहता है जिसके कारण आसपास के रहवासियों का वहां रहना दुश्वार हो गया है।
कारखाने में देर रात तक भी काम जारी रहता है। इसकी वजह से रात में भी लोगों को चैन नहीं मिल रहा है। ज्यादा परेशानी बुजुर्गों और छात्र-छात्राओं को हो रही है। शोर के कारण बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। बुजुर्ग व मरीज चैन की नींद नहीं ले पा रहे हैं।
कालोनी की महिलाओं ने कारखाने के कारीगरों के अभद्र आचरण की शिकायत की। महिलाओं ने कहा कि कारखाने के कारीगरों के कारण वे अपने घरों की बालकनी में भी नहीं बैठ सकतीं। कर्मचारी कहीं भी लघुशंका के लिए खड़े हो जाते हैं। आपस में तेज आवाज में भद्दे मजाक और गाली-गलौच करते हैं। जिसके कारण अक्सर उन्हें अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
कारीगरों के अभद्र व्यवहार की शिकायत कारखाना संचालक से कई बार की गई लेकिन कारीगरों की हरकत में कोई सुधार नहीं आया। रहवासियों का कहना है कि यदि कारखाना अन्यत्र नहीं हटाया गया तो उन्हें सड़क पर उतरना पड़ेगा।
भारी-भरकम उपकरण बनाए जा रहे
कारखाने में सड़क निर्माण में उपयोग किए जाने वाले फोर बिन, मिक्चर मशीन आदि भारी-भरकम उपकरण बनाए जाते हैं। टीन की चादर से बनने वाले इन उपकरणों को बनाने के दौरान कारखाने से तेज शोर होता है। काम ज्यादा होने की स्थिति में वेल्डिंग और डेंटिंग आदि काम कारखाने के बाहर भी किए जाते हैं। इसके लिए उपयोगी औजार, टीन की चादरें ओर आधे-अधूरे उपकरण का ढेर कारखाने के बाहर भी बिखरा रहता है। कारखाने के आसपास घनी आबादी है। इसके दोनों ओर से कालोनी का पहुंच मार्ग है।
लोगों की शिकायत पर
भास्कर ने की पड़ताल
आपकी
आवाज
डीआईसी के मैनेजर ने कहा-
॥उद्योग की स्थापना और संचालन के लिए संबंधित ग्राम पंचायत अथवा नगर पालिका की एनओसी मांगी जाती है। एनओसी मिलने के बाद उसे परमिशन दिया जाता है। आप किस उद्योग की बात कर रहे हैं, मैं समझ नहीं पा रहा हूं। उद्योग यदि आबादी के बीच संचालित हो रहा है तो यह देखना पड़ेगा कि वह वहां कैसे संचालित हो रहा है।ञ्जञ्ज एसपी शर्मा
निगम आयुक्त ने कहा-
॥आबादी के बीच उद्योग का संचालन नियम विरुद्ध है। उद्योग को परमिशन कैसे मिला, यह देखना पड़ेगा। गुरुवार को इस संबंध में पूरी जानकारी ली जाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।ञ्जञ्ज एसके सुंदरानी
समाधान निकाला जाएगा
॥मेरे पास उद्योग विभाग व नगर निगम की परमिशन है। निगम में हर साल परमिशन का नवीनीकरण होता है। इसकी फीस जमा होती है। आदित्य नगर व जवाहर नगर का लैंडयूज उद्योग सह कालोनी का है। मेरे कारखाने के पीछे औद्योगिक क्षेत्र है। इसी आधार पर मुझे परमिशन मिली है। हम वहां केवल फेब्रिकेशन का काम करते हैं। देर रात तक काम नहीं होता। तेज शोर तथा कारीगरों के व्यवहार को लेकर कालोनीवासियों को शिकायत है तो इसका उपाय करने की कोशिश करुंगा।ञ्जञ्ज
रविंद्र पटेल
दस साल से फैक्ट्री का संचालन
फैक्ट्री एक्ट के तहत किसी फैक्ट्री की स्थापना और संचालन के लिए 65 प्रकार की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। उद्योग की स्थापना और उसके संचालन के लिए पर्यावरण से लेकर लेबर और बिजली, पानी, संबंधित ग्राम पंचायत अथवा नगर पालिका आदि विभागों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आदित्य नगर व जवाहर नगर कालोनी की हजारों की आबादी के बीच यह उद्योग दस साल से संचालित हो रहा है। लेकिन जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी ही नहीं है। इस संबंध में पूछे जाने पर अधिकारियों ने जवाब दिया कि वे पता करवाते हैं।
दिक्कत - शिकायत, दिन-रात होता है काम, शोर से हलाकान, भद्दे कमेंट भी
अधिकारियों ने कहा- मामले को चेक करते हैं
आदित्यनगर में रहवासी इलाके में संचालित हो रही फैक्ट्री।
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