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गड्ढे व धूल से लोग परेशान

7 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर - भिलाई
ग्रामीण क्षेत्रों को शहर से जोडऩे वाला कोहका रोड जर्जर हो गया है। पूरी सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। पत्थर के टुकड़े बिखरे पड़े हैं। नाला से लेकर पुरानी बस्ती तक तो डामर का कहीं नामोनिशान नहीं है। इस कच्ची सड़क पर दिनभर भारी वाहन चलते हैं। धूल का गुबार छाया रहता है। राहगीर तो परेशान है ही आसपास के लोगों का भी जीना मुश्किल हो गया है।
दस साल पहले 2004 में इस रोड का डामरीकरण हुआ था। उसके बाद कभी भी मरम्मत नहीं हुआ। नगर निगम प्रशासन ने 2012-13 में अधोसंरचना मद से दो चरणों में इस सड़क को बनाने की प्लानिंग की थी। रानी अवंति बाई चौक से आर्य नगर दुर्गा मंदिर तक 5 करोड़ की लागत से सीमेंटीकरण करने का और उसके आगे नाला तक 5.36 करोड़ से डामरीकरण। सड़क की चौड़ाई बढ़ाकर 15 मीटर करने और दोनों तरफ एक-एक मीटर की नाली बनाने की भी योजना थी। इसके लिए अतिक्रमण हटाए गए।
कुछ स्थानों पर नाली बनी भी, लेकिन सड़क का अभी तक पता नहीं है। अब नगर निगम प्रशासन ने एक बार फिर भारत सरकार की यूआईडीएसएसएमटी ((लघु एवं मझोले श्रेणी के शहरों का एकीकृत विकास)) योजना के तहत इस सड़क को बनाने के लिए 20 करोड़ 32 लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा है।




करोड़ों का पुल काम का नहीं

बजट नहीं दिया

वार्ड पार्षद महेश वर्मा का कहना है कि इस रोड को बनवाने के लिए उन्होंने कई बार प्रयास किया। लोगों के साथ धरना दिया। हस्ताक्षर अभियान भी चलाया। दो साल पहले अधोसंरचना मद से स्वीकृति मिल गई थी, लेकिन बजट नहीं दिया। शासन ने 58 की जगह 50 करोड़ दिया तो निगम ने कोहका रोड और कैंप क्षेत्र की एक और सड़क को प्रस्ताव से हटा दिया। अब यूआईडीएसएसएमटी के तहत फिर से प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है।

सालभर पहले कोहका नाला पर 1 करोड़ 22 लाख रुपए का पुल तो बन गया, लेकिन सड़क को जस की तस जर्जर छोड़ दिया गया है। चार पहिए तो छोड़ दीजिए दो पहिए वाहन चालकों को भी गुजरना मुश्किल हो गया है। बारिश में कीचड़ और अब धूल और गड्ढों के कारण राहगीर इस रास्ते से जाने में कतरा रहे हैं। अब यह पुल अनुपयोगी साबित हो रहा है।



दिनभर गुजरते हैं भारी वाहन

इस रोड पर दिनभर भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। जेवरा-सिरसा, ननकट्ठी और धमधा क्षेत्र से रेत, ईंट, मुरम व गिट्टियां ढोने वाले ट्रक इसी रास्ते से शहर आते-जाते हैं।

कोहका-आर्यनगर की सड़क जर्जर।



आर्यनगर में कुछ दिन पहले जीप की चपेट में आने से बच्ची की मौत हुई थी।

कोहका-आर्यनगर रोड पर भारी वाहनों के चलने से उड़ रही धूल।

ञ्चभारी वाहनों के चलते ने दिनभर उड़ती है धूल।

ञ्चसड़क पर पत्थर के टुकड़े बिखरे होने से बढ़ा खतरा।

समस्या - दस साल से डामरीकरण नहीं होने के कारण लोगों का चलना हुआ मुश्किल

शहर को जोड़ती है यह सड़क

कुटेलाभाठा, खपरी, खम्हरिया, जेवरा, सिरसा, चिखली, भटगांव, समोदा, कचांदुर, करंजा भिलाई, रवेलीडीह, बोड़ेगांव, ननकट्टी, कोडिय़ा और नदी उस पार के गांवों के अलावा धमधा, साजा, देवकर, बेमेतरा, नवागढ़ आदि क्षेत्रों से भिलाई आने-जाने वाले लोग इसी रास्ते से होकर गुजरते हैं।