एसीसी को जमीन देने पर बीएसपी को आपत्ति
ञ्चबीएसपी का दावा कि जमीन उसकी
ञ्चखनिज विभाग ने एसीसी जामुल को खनन के लिए पट्टे पर दिया है।
सिटी रिपोर्टर - दुर्ग
बीएसपी की 35.68 हेक्टेयर जमीन का पट्टा चूना पत्थर उत्खनन के लिए एसीसी जामुल को दिए जाने का मामला कानूनी दांवपेंच में उलझता जा रहा है। आज कलेक्टर कोर्ट में पट्टा दिए जाने पर बीएसपी की ओर से फिर आपत्ति दर्ज कराई गई। बीएसपी की ओर से अधिवक्ता अभिषेक वैष्णव ने कलेक्टर कोर्ट में लिखित आपत्ति पेश कर तर्क दिया कि खनन के लिए दिया गया पट्टा अवैध है,उसे शून्य घोषित किया जाए। संबंधित जमीन धमधा ब्लाक के नंदनी खुंदनी में है।
जिसका खसरा नंबर1942 व 1946 है। इस जमीन को चूना पत्थर उत्खनन के लिए खनिज विभाग ने एसीसी जामुल को दिया है। बीएसपी ने इस पर जब उत्खनन करने से रोका तब एसीसी प्रबंधन ने कलेक्टर कोर्ट में आवेदन कर बताया कि जमीन पर उत्खनन के लिए 2008 में पट्टा दिया गया है। प्रतिकर राशि का निर्धारण हो चुका है। एसीसी प्रबंधन ने इसी आधार पर उत्खनन की अनुमति मांगी है। इसके विरोध में बीएसपी प्रबंधन की ओर से अधिवक्ता वैष्णव ने कलेक्टर कोर्ट में लिखित तर्क पेश कर बताया कि बीएसपी के तत्कालीन मैनेजिंग डायरेक्टर ने पट्टे के संबंध में कोई लिखित अनुमति नहीं दी है।
खनिज विभाग ने किया नियमों का उल्लंघन
तर्क में यह भी कहा गया है कि अभिलेख में 16 सितंबर 2008 को पट्टा खनिज विभाग द्वारा देना बताया जा रहा है वह कानून का उल्लंघन है। प्रतिकर राशि का निर्धारण धमधा तहसीलदार द्वारा किया जाना बताया गया है वह भी कानून का उल्लंघन है। क्योंकि जमीन के सही मूल्यांकन लिए केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त एजेंसी से राय लिखित में लिए जाने का प्रावधान है। उनके द्वारा मूल्यांकन करने के बाद ही उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
केंद्र सरकार की जमीन पर लगी है
बीएसपी की ओर से पेश तर्क में केंद्र सरकार के आदेश का हवाला भी दिया गया है,जिसके अनुसार केंद्र सरकार की जमीन को पट्टे पर देने, हस्तांतरण करने व बिक्री करने पर रोक लगाई गई है। बीएसपी, सेल की ईकाई है, जो केंद्र शासन का उपक्रम है।
5 करोड़ 18 लाख का प्रतिकर
तर्क में यह भी कहा गया कि एसीसी की ओर से ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया है जिससे प्रतिकर राशि का निर्धारण कर बीएसपी को दिया गया साबित हो। संबंधित जमीन का निकाला गया प्रतिकर राशि 5 करोड़ 18 लाख 7 हजार 360 रुपए विधिवत नहीं है।
विवाद - कलेक्टर कोर्ट में की गई लिखित शिकायत