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नसबंदी के बाद गर्भवती हुई ७ लाख का परिवाद निरस्त

7 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर - दुर्ग
नसबंदी करवाने के बाद गर्भवती होने पर एक महिला ने जिला उपभोक्ता फोरम में शासन से हर्जाना दिलवाने के लिए परिवाद पेश किया था, पर नियमों के तहत दिशा निर्देश का पालन न करने के कारण पर फोरम ने सुनावई को बाद उनका परिवाद निरस्त कर दिया।
कोहका रोड सुपेला निवासी कविता श्रीरंगे पति दिलीप श्रीरंगे ने फरोम में परिवाद पेश कर सात लाख रुपए का हर्जाना दिलवाने का आग्रह किया था। परिवाद में उन्होंने नसबंदी आपरेशन करने वाली शासकीय लालबहादूर शास्त्री अस्पताल सुपेला की स्त्रीरोग विशेषज्ञ डा. निर्मला यादव व वहीं के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उत्तरवादी बनाया था। परिवाद के मुताबिक कविता तीन पुत्रियों के बाद और संतान नहीं चाहती थी। इसलिए वह नसबंदी करवाने शास्त्री अस्पताल गई। 9 दिसंबर 2011 को आपरेशन किया गया। तीन माह बाद जब मासिक क्रिया नहीं हुई तब वह फिर अस्पताल गई। सोनोग्राफी टेस्ट में 21 सप्ताह का गर्भावस्था पाया गया। शासन की ओर से पैरवी करने वाले अधिक्ता सुदर्शन महलवार ने बताया कि महिला ने आपरेशन कराते समय दिए गए दिशा निर्देश का पालन नहीं किया। आपरेशन कराते समय नसबंदी के लिए सहमति पत्र एवं संसूचित पत्र की कंडिका-8 में यह स्पष्ट रुप से दिशा निर्देश है कि यदि आपरेशन कराने के बाद अगला मासिक धर्म के समय मासिक धर्म नहीं आता तो उसकी सूचना दो सप्ताह के भीतर देनी चाहिए।