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धान बेचना किसी आफत से कम नहीं

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज-!-कांकेर
समर्थन मूल्य पर चल रही धान खरीदी में अव्यवस्था किसानों के लिए परेशानी बनती जा रही है। ज्यादातर ख्ररीदी केंद्रों में जरूरत के अनुसार परिवहन नहीं होने से जगह की कमी हो रही है। इससे किसानों के धान का तौल लेट से हो रहा है। इसके अलावा खरीदी केंद्रों में ठसाठस धान की बोरियों की देखरेख करना केंद्र प्रभारियों के लिए चुनौती बना हुआ है।
काफी किसानों को अपनी बारी का इंतजार करने रात भी खरीदी केंद्र में गुजारनी पड़ती है। 21 अक्टूबर से धान खरीदी शुरू हुई लेकिन खराब मौसम के कारण कटाई में किसान पिछड़ गए तथा शुरू के एक माह तो खरीदी केंद्रों में बोहनी तक नहीं हो पाई थी। इसके बाद एकाएक केंद्रों में धान की आवक शुरू होने तथा ऊपर से परिवहन नहीं होने से अव्यवस्था का आलम हो गया है। जिन खरीदी केंद्रों का परिसर छोटा है वहां तो धान रखने तक के लिए जगह नहीं है। धान रखने के लिए जगह नहीं होने से किसानो को कांटा कराने काफी परेशानी होती है। कई जगह पर तो धान रखने घेराव भी नहीं हुआ है और न ही गेट लग पाया है।




शीघ्र शुरू किया जाएगा संग्रहण केंद्र

॥अभी तक मिलर्स ही धान का उठाव करते आ रहे थे लेकिन अब परिवहन में तेजी लाने एक संग्रहण केंद्र से भी धान का परिहवन शीघ्र शुरू कराया जाएगा। किसी भी केंद्र में परिवहन नहीं होने के चलते धान खरीदी प्रभावित नहीं हो रही है।ञ्जञ्ज

केके देवांगन, जिला विपणन अधिकारी

कांकेर. खरीदी केंद्र में किसानों को रुकना पड़ रहा है, एक से ज्यादा।

किसानों को तौलाई कराने में लग रहे हैं तीन-तीन दिन



खरीदी केंद्र में धान खुले में पड़ा हुआ है। जो किसान धान नहीं बेच पाए हैं। ऐसे किसानो की चिंता आसमान में छाए बादलों को लेकर बढ़ गई है। बारिश होने पर खुले में रखे धान को नुकसान होने की संभावना है। ग्राम पटौद के ऋषि कुमार साहू, जोहन कुंजाम, अंजनी के राम सिंग नेताम, समारू राम साहू, सुरेंद्र साहू, सरंगपाल के राजेश पटेल, दिलीप सलाम, सिदेसर के अंकालू राम साहू, भीरावाही के नंदकुमार जैन ने कहा कई खरीदी केंद्र में धान खुले में पड़ा हुआ है। बारिश होने पर इससे नुकसान काफी होगा। धान का परिवहन धीमी गति से होने से किसानो के लिए परेशानी बढ़ जाती है। धान जाम की स्थिति बनने से कांटा जल्दी नहीं हो पाता है और किसानों को काफी समय तक इंतजार करना पड़ता है। कई बार तो दूसरे दिन कांटा हो पाता है।



बदली छाने से बढ़ी चिंता

अभी तक की स्थिति में जिले में 12.99 लाख क्विंटल धान खरीदी हो चुकी है। इसमें से परिवहन मात्र 3.35 लाख क्विंटल का हो पाया है। यानी औसत में बात करें तो मात्र 25 प्रतिशत धान का परिवहन हो पाया है जबकि शेष 75 प्रतिशत धान खरीदी केंद्रों में पड़ा हुआ है। जिस गति से धान की आवक बढ़ रही है उस गति से परिवहन नहीं होने से अव्यवस्था हो रही है। अभी तक की स्थिति में 33 मिलर्स के द्वारा धान का परिहवन किया जा रहा है। संग्रहण केंद्र शुरू नहीं किए जाने से धान का उठाव तेजी से नहीं हो रहा है। गत वर्ष अभी तक की स्थिति में संग्रहण केंद्र में धान का उठाव शुरू हो गया था। संग्रहण केंद्र भानुप्रतापपुर, कांकेर व लखनपुरी में हैं।



75 फीसदी जाम