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खपरैल की कुटिया में स्कूल तो कहीं बच्चे कम

8 वर्ष पहले
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राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत घुमंतू बच्चों व पलायन कर गए श्रमिकों के बेसहारा व गरीब बच्चों के लिए आवासीय व गैर आवासीय शिक्षण केंद्रों का अंचल में बुरा हाल है। कहीं दर्ज संख्या के अनुपात में बच्चे नहीं मिले तो कहीं खपरैल की कुटिया में स्कूल संचालित है। बलौदाबाजार जिले में कुल 33 केंद्र संचालित हैं, जिले में संचालित 9 करोड़ का फंड आबंटित है जबकि मिशन ने अब तक 3 करोड़ रुपए की जारी किए हैं। इसी तरह गरियाबंद व रायपुर जिले के कई सेंटर इसलिए नहीं खुल पाए क्योंकि प्रस्ताव भेजने के बाद भी राशि नहीं मिली। सभी शालाएं स्थानीय महिला स्व सहायता समूह व प्रदेश स्तर के एनजीओ संचालित कर रहे हैं जिसमें प्रति बच्चे 20 हजार रुपए सालाना दिए जाते हैं। इन केंद्रों में शिक्षकों को महीनों से वेतन भी नहीं मिला है । देवभोग के 3 आवासीय व 8 गैर आवासीय केंद्र आवंटन के अभाव में बंद पड़े हैं तो भाटापारा में खपरैल की कुटिया में चल रहा है। नवापारा-राजिम के दो सेंटरों में दर्ज संख्या 40 बताकर 9 बच्चों को पढ़ाया जा रहा था।