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मलेरिया की दवा मिली कचरे में

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - गरियाबंद
जिंदगी बचाने वाली जीवन रक्षक मलेरिया की दवा कचरे के ढेर में मिली है। हजारों रुपए की इस दवाइयों को लेकर घोर लापरवाही सामने आई है। बुधवार को तहसील दफ्तर के बाहर स्टांप वेंडर के समीप कचरे के ढेर में उपयोगी दवा ऐसे पड़ी थी कि मानो यह दवाई अनुपयोगी है। नागरिकों ने इसकी जानकारी दी तो पता चला कि मलेरिया की दवा को अनुपयोगी दवा समझ किसी अज्ञात ने फेंक दिया है।
इस मामले की जानकारी जिला स्वास्थ्य प्रशासन को दी गई तो विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया दूर करने वाली होम्योपैथी टेबलेट को मितानिनों के माध्यम से वितरित की जानी थी। वितरण तो हुआ नहीं उलटे यह दवाई
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बडी संख्या में सार्वजनिक स्थान के कचरे में मिली है। उल्लेखनीय है कि होम्योपैथिक चिनिनम सल्फ-200 नामक की टेबलेट को बीते अक्टूबर माह में वितरित की जानी थी, लेकिन गांव में यह दवाई बंटी नहीं और जिला मुख्यालय में इस उपयोगी दवा का इस तरह से पाया जाना अपने आप में सवाल खड़ा करता है। राज्य स्वास्थ्य संसाधन केंद्र के माध्यम से दवाई का वितरण किया जाना था। इसके ब्लॉक समन्वयक होरीलाल साहू का अलग ही तर्क है। चर्चा के दौरान बताया कि एक लाख मलेरिया की दवा भेजी गई थी, जिसमें से 95 हजार दवा 422 मितानिनों के माध्यम से वितरित की गई है। उन्होंने कचरे के ढेर में मिली दवा के संबंध में बताया कि यह अतिरिक्त दवा थी। धोखे में फेंक दी गई। जानकारी दी कि पांच हजार टेबलेट अतिरिक्त रखी थी। किसके द्वारा कचरे में फेंका गया है, साहू ने गोलमोल जवाब दिया। सन 2013 में निर्मित यह दवा 2015 तक काम आनी थी। चूक और लापरवाही के इस मामले पर स्वास्थ्य प्रशासन ने भी संज्ञान लिया है। पत्रकारों को इसकी जानकारी होने पर फेंकी गई दवा को एकत्रित भी कर लिया गया है।




दोषियों पर कार्रवाई

इस संबंध में मुख्य जिला एवं स्वास्थ्य अधिकारी जेएल उइके ने गंभीरता से लेते हुए कहा है कि मितानिनों के माध्यम से टेबलेट का वितरण किया जाना था। इस अभियान के जिला समन्वयक को तलब किया है। उन्हें भी समझ में नहीं आ रहा है कि मलेरिया के टेबलेट कैसे बाहर पड़ी मिली है। इसके दोषी के खिलाफ कार्यवाही होगी।



हाई रिस्क इलाके में बांटने आई थी दवा

नॉट फॉर सेल की यह सरकारी दवा जो गरियाबंद, मैनपुर मलेरिया हाई रिस्क क्षेत्र में बांटी जानी है। सुरक्षित स्थान पर यह दवा रहनी चाहिए, कारण कि मलेरिया के लिए यह उपयोगी दवा है। यह दवा दो वर्षों तक काम आनी है। इसको लेकर घोर लापरवाही पर जिला स्वास्थ्य प्रशासन ने भी चिंता जाहिर करते हुए गंभीरता दिखाई है। मलेरिया बीमारी से पूर्व में अनेक मौतें हो चुकी हैं। इसकी जीवनरक्षक दवा के कहीं पर भी पाए जाने पर स्वास्थ्य प्रशासन भौंचक हैं।