साल भर से मजदूरी के लिए भटक रहे
कई बार पंचायत व रोजगार सहायक से शिकायत कर चुके
भास्कर न्यूज - कांकेर
ग्राम मालगांव में रोजगार गारंटी योजना के तहत काम करने वाले मजदूरों को गत वर्ष की मजदूरी का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। भुगतान में हो रही लेटलतीफी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। इन्होंने बताया कि कई बार मजदूरी भुगतान की पंचायत के साथ रोजगार सहायक से शिकायत कर चुके हैं लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला है।
मिली जानकारी के अनुसार 2013 में रोजगार गारंटी के तहत बहुत सारे काम ग्राम मालगांव में हुए थे। गर्मी में मार्च से मई मई तक सड़क निर्माण कार्य में मिट्टी का कार्य, बांध गहरीकरण, खेती भूमि का समतलीकरण का काम हुआ था। नवंबर दिसंबर माह में बांध का गहरीकरण का काम फिर से मनरेगा के तहत हुआ। विभिन्न कामों में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने काम किया लेकिन ऐसे कई मजदूर हैं जिनका अब तक मजदूरी भुगतान नहीं हुआ है। बांध गहरीकरण में काम करने वाली श्यामा बाई कावड़े को 2 सप्ताह का मजदूरी भुगतान नहीं हुआ है। पता चला है कि धनेश राम नेताम को 12 दिन का भुगतान भूमि समतलीकरण का नहीं हुआ है। बहुरा मरकाम को 6 दिन, सरजु कावड़े को दो सप्ताह का भुगतान नहीं हुआ है। मानोबाई पोया का 6 दिन का भुगतान नहीं हुआ है। सीता बाई नेताम को तीन दिन का भुगतान नहीं हुआ है। जगदीश कुमेटी को सड़क निर्माण का दो सप्ताह का पैसा प्राप्त नहीं हुआ है। संदीप ठाकुर को 18 दिन का मजदूरी भुगतान नहीं हुआ है। पोया मरकाम, अहिल्या नेताम को भी सप्ताह भर का पैसा प्राप्त नहीं हुआ है।
ग्रामसभा में होगी चर्चा
॥मजदूरी भुगतान नहीं होने की जानकारी नहीं है। इस संबंध में पूरी जानकारी 24 जनवरी को ग्राम सभा की बैठक में ली जाएगी तथा निराकरण किया जाएगा।ञ्जञ्ज
सुखचंद मंडावी,
सचिव, ग्राम पंचायत मालगांव
मामले की होगी जांच
॥मजदूरी भुगतान नहीं होने की जानकारी ग्रामीणों के साथ रोजगार सहायक ने अभी तक नहीं दी है। रोजगार सहायक से पूरी जानकारी लेते मामले की जांच कराई जाएगी। यदि मनरेगा का भुगतान शेष होगा तो भुगतान कराया जाएगा।ञ्जञ्ज
राहुल तारम,
कार्यक्रम अधिकारी, मनरेगा, कांकेर
छह माह से पखांजुर का कृषि विभाग मजदूरों को नहीं दे रहा मजदूरी
कांकेर - मजदूरों को समय पर उनकी मजदूरी नहीं मिलने से उनकी परेशानियां बढ़ती जाती है। ऐसी ही परेशानी से गुजर रहे कृषि विभाग पखांजूर के अंतर्गत कार्य करने वाले कई मजदूरों ने भुगतान के लिए जिला प्रशासन से गुहार लगाई है। ये मजदूर पिछले 6 माह से भुगतान के लिए कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं।
इस संबंध में मजदूरों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा है जिसमें कहा गया है कि कृषि प्रक्षेत्र पखांजूर अंतर्गत 64 मजदूर दैनिक दर पर मजदूरी के रूप नियमित कार्य करते आ रहे हैं। 6 माह से अब तक कार्य भुगतान नहीं किया गया है जिससे भरण पोषण एवं बच्चों की पढ़ाई लिखाई प्रभावित हो रही है। समय पर मजदूरी भुगतान नहीं मिलने पर मजदूरों को मानसिक व आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। विभागीय अधिकारियों से अनेक बार भुगतान के लिए कहा गया लेकिन किसी ने अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया। मजदूरों ने शीघ्र कार्रवाई करते भुगतान कराने की मांग की है।
इसके लिए संबंधित 64 मजदूरों का हस्ताक्षर वाला ज्ञापन भी जिला प्रशासन को सौंपा गया है। ज्ञापन सौंपने बेस्टो नाग, बर्मन जाल, जगन्नाथ सागरिया, सुस्ता जाल, चंचल टांडी, कुरेश्वर हंस, सनबोध सागरिया, नंदु सागरिया, लंबु गहिर, खरत पोढ, सदाराम नाग तथा धर्मेंद्र सागरिया कलेक्टोरेट पहुंचे थे।
भुगतान का चेक दिया संवेदनशील इलाके का देकर डाला मुसीबत में
कांकेर - मनरेगा के कार्यों का चेक के माध्यम से मजदूरी भुगतान पाने ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने व्यवस्था में बदलाव लाते नगदी मजदूरी भुगतान की मांग की है। ऐसी ही मांग लेकर जिला कार्यालय पहुंचे भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम जलहूर से पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम जलहूर में रोजगार गांरटी योजना के तहत तालाब निर्माण का कार्य किया जा रहा है। जिसमें उक्त ग्रामीणों द्वारा मजदूरी की जा रही है। जिसका भुगतान आसुलखार स्थित बैंक में होना है। अति संवेदन शील होने के कारण भुगतान के लिए बैंक तक जाने तथा आने में काफी परेशानी होती है। इसके चलते ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारी से गांव में ही नगदी भुगतान की मांग की थी लेकिन अधिकारी ने ऐसा आदेश होने से इंकार कर दिया। जबकि ग्राम पंचायत भानबेड़ा, भेजा, बरबस पुर, बासंकुड, कोरर एवं बारवी में मनरेगा के कार्यों का भुगतान सशर्त सरपंच के खाते में जमा कर भुगतान कराया जा रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इसी तरह उन्हें भी भुगतान किया जाए। मांग करने वालों में अर्जुन सिंह, सियाराम, चरण सिंह, सहदेव, श्रीबल, राम भरोस, नहगुराम, सोमारू राम, अनिल आंचला, मोहन, जानकी, बालन, सुखमाय, देवकी, सोहन, बक्को, सुनीता, श्रीबत्ती, बुधनी बाई, रामदेव, राम लाल, माथूराम, हिरेंद्री, दसरी समेत अन्य ग्रामीण शामिल हैं।