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अवैध कब्जा हटाया तो किसान दे रहा आत्मदाह की धमकी
दो बार ग्राम सभा करने के बाद हुए सरकारी भूमि से किसान का बेजा कब्जा हटाया तो अब किसान अनुचित तरीका अपना रहा
भास्कर न्यूज - कांकेर
लग रहा है कि जिला पंचायत में हुए आत्मदाह कांड ने अब गलत तरीके से लोगों को अपनी बात मनवाने का एक नया रास्ता दिखा दिया है। जिले में शुरू हुई गलत परंपरा जिला प्रशासन के लिए मुसीबत खड़ी करती जा रही है। जिला प्रशासन के सामने अब अतिक्रमण की कार्रवाई करने को लेकर आत्मदाह कर लेने की धमकी सामने आई है। इस बार ग्राम सातलोर के किसान तिहारू राम कोर्राम ने अतिक्रमण हटाने की गई कार्रवाई को अनुचित बताते आत्मदाह करने की धमकी दी है।
विदित हो किसान ने गांव के गौठान की जमीन में वर्षों से अतिक्रमण कर रखा है, जिसे हटाने ग्राम पंचायत ने 4 जनवरी को बैठक कर प्रस्ताव रखा था। बैठक में 11 जनवरी तक जमीन को ग्राम पंचायत को सौंपने किसान को नोटिस जारी की गई थी लेकिन किसान ने जमीन से कब्जा नहीं हटाया। इसके चलते 19 जनवरी को विशेष ग्रामसभा बुलाई गई जिसमें पंचायत प्रतिनिधियों के अलावा नायब तहसीलदार तथा पुलिस के जवान भी मौजूद थे। सभा के बाद लिए गए निर्णय अनुसार प्रशासन ने कार्रवाई करते कब्जे की भूमि से बोर आदि को निकाल जब्त कर लिया तथा तार से घेरे गए बाउंड्री को उखाड़ फेंका।
कब्जा हटाने की इस कार्रवाई से नाराज किसान ने कार्रवाई को अनुचित बताते जमीन व बोर में लगी मशीन को वापस करने के अलावा तोड़े गए मकान व बाड़ी को पुन: दुरूस्त करने की मांग की है। किसान ने धमकी दी है कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो
वह तहसीलदार निवास के सामने भूख हड़ताल पर बैठेगा तथा दो दिन बाद आत्महत्या कर लेगा और जिसकी जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी।
सरकारी भूमि से ही कब्जा हटाया
॥किसान के बेजा कब्जा को हटाया गया है। उसने अनुदान लेते समय कृषि विभाग में अपने वास्तविक भूमि का नक्शा पेश किया है और बोर शासकीय भूमि में कराया है। यदि वहां और भी लोगों ने शासकीय भूमि पर कब्जा किया है तो उन्हें भी हटाया जाएगा।ञ्जञ्ज
अलरमेल मंगई डी,
कलेक्टर कांकेर
स्वयं के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद किसान तथा उसके भांजे भूपेंद्र दर्रो ने कार्रवाई को तो अनुचित बताया ही है साथ में अन्य बेजा कब्जाधारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। दोनों ने बताया कि उनकी चार पीढ़ी उक्त जमीन पर कृषि कार्य कर जीवन यापन कर रही है। जब अनुदान लेकर उक्त जमीन में बोर कराया गया तो उस वक्त प्रशासन ने उसे शासकीय जमीन बता क्यों नहीं रोका। अब कुछ लोगों के स्वार्थ के चलते उक्त जमीन को बेजा कब्जा बता रहे हैं। यदि उक्त जमीन को बेजा कब्जा बता कार्रवाई की गई तो इसी तरह और भी लोग गोठान की जमीन में काबिज है उनके खिलाफ क्यों कार्रवाई नहीं की गई।
अन्य कब्जाधारियों पर भी कार्रवाई हो