धड़ल्ले से अवैध रेत उत्खनन
विभाग के जिम्मेदार जान का खतरा बताकर कार्रवाई से पल्ला झाड़ रहे
भास्कर न्यूज - कांकेर
सुप्रीम कोर्ट के फरमान के बाद जिले की सभी स्वीकृत खदानों में से एक को छोड़कर शेष में रेत खनन पर रोक लगा है। इसके बावजूद कई स्थानों से धड़ल्ले से रेत निकाल जा रही है और ऊंचे दामों पर रसूखदार जरूरतमंदों को सप्लाई की जा रही है। रेत के अवैध उत्खनन के इस खेल में बताया जाता है कि कुछ रसूखदार व बड़े ठेकेदारों का पूरा ग्रुप शामिल है। कहा जा रहा है कि इनके खिलाफ कार्रवाई करने में खनिज विभाग के भी हाथ कांप रहे हैं। वहीं जैसे तैसे अपना छोटा सा आशियाना बनाने में जुटे गरीब तबके के लोगों को रेत नहीं मिल पा रही है।
लोगों का आरोप है कि खनिज विभाग की दोहरी नीति का सीधा खामियाजा गरीब तबकों को ही उठाना पड़ रहा है और बड़े बड़े व्यवसायिक प्रतिष्ठान तथा अन्य बड़े भवन बनाने में जुटे ठेकेदारों कार्य पूरी रफ्तार से चल रहा है। शिकायत मिली है कि रात में हो रहे अवैध उत्खनन की जानकारी होने के बावजूद खनिज विभाग रात में खदान तक जाने या रेत भर कर आ रहे वाहनों को रोकने में अपने जान का खतरा बताकर कार्रवाई करने से इंकार कर रहा है। लोग सवाल कर रहे है कि इतना सब कुछ जानने के बाद भी कार्रवाई नहीं करने के पीछे क्या वाकई विभाग के नुमांइदों को जान का खतरा है या और कुछ, यह जांच का विषय है। मिली जानकारी के अनुसार पाबंदी के बाद से हर रात जिला मुख्यालय के इर्द गिर्द नदियों से रेत का बड़े पैमाने पर खनन कर उसे जिला मुख्यालय में निर्माणाधीन कार्य स्थल तक पहुंचाया जा रहा है। रेत भर कर वाहनों का शहर के मध्य से गुजरने के बावजूद खनिज और पुलिस विभाग इनके खिलाफ कार्रवाई करने से बच रहा है।
कांकेर. नदियों से रेत का अवैध उत्खनन जोर शोर से है जारी।
बीच सड़क पर रास्ता रोककर अनलोड
अवैध रूप से रेत चोरी में जुटे बड़े खनिज माफिया के हौसले इतने बुलंद है कि वे बीच शहर से बेधड़क गुजरते ही है साथ में यदि सड़क किनारे किसी निर्माण स्थल पर रेत अनलोड करना चाहते है तो रास्ते में ही बिना किसी डर भय के जाम भी लगा देते हैं। जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइन लग जाती है।
सिर्फ भिरौद को अनुमति
जिले में रेत की कुल 36 स्वीकृत खदानें है। जिसमें मात्र एक चारामा तहसील के ग्राम पंचायत भिरौद को ही वर्तमान पर्यावरण के केंद्रीय मंडल से रेत निकालने की अनुमति मिली है। शेष 35 खदानों पर रोक लगी हुई है। जिसमें कांकेर तहसील में कोदाभाट, सरंगपाल, मनकेसरी, दसपुर, अर्जुनी, आतुरगांव, नाथिया नवागांव, पांडर वाही गौरगांव, बारदेवरी, अन्नपूर्णापारा, राजापारा, भीरा वाही, चारामा तहसील में माहूद, हाराडुला, सिरसिदा, तेलगरा, पिपरौद, बासनवाही, चारामा, नैनी नदी घाट, सराधुनवा गांव, चिनौरी, कोयलीबेड़ा तहसील में कोयलीबेड़ा, भानुप्रतापपुर तहसील में कुल्हाड़कट्टा, नारायणपुर, कुर्री, रानवाही, हेटारकसा, पखांजूर तहसील में बडग़ांव, नरहरपुर तहसील में दुधावा, ढेकुना, जुनवानी, मासुलपानी, बुदेली तथा अंतागढ़ तहसील में मात्र अंतागढ़ में रेत की खदान है।
रात में कार्रवाई करना संभव ही नहीं
॥जिले में रेत का अवैध खनन नहीं हो रहा है। सिर्फ भिरौद खदान से ही रेत निकाली जा रही है, जहां से अनुमति है। रात में खनिज माफिया के खिलाफ कार्रवाई करना संभव नहीं है। कर्मचारियों को जान का खतरा बना रहता है। फिर भी शिकायत मिलने पर सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस की मदद लेकर कार्रवाई की जाएगी। स्पाट पर पड़ी रेत के खिलाफ कार्रवाई करना मुश्किल है। पूर्व में वाहनों में अवैध रूप से लाई जा रही रेत के खिलाफ कार्रवाई की गई है।ञ्जञ्ज
राजेश मालवे, जिला खनिज अधिकारी कांकेर
मजदूरों को दे रहे दोगुनी मजदूरी
शहर के इर्द गिर्द अवैध रूप से रेत निकालने में सरंगपाल स्थित महानदी खदान सबसे आगे है। यहां हर रात एक बजे के बाद रेत का अवैध उत्खनन शुरू हो जाता है। कुछ ठेकेदारों ने आतुरगांव स्थित नदी को अपना ठिकाना बना रखा है। कुछ शहर के बाहर दूध नदी से ही रेत निकालने जुटे हुए है। रात में पूरे गति से इस चोरी के कार्य को अंजाम देने बड़े ठेकेदारों द्वारा अत्याधुनिक स्वचलित वाहनों का उपयोग किया जाता है। वहीं ट्रैक्टर से रेत चोरी में जुटे लोग मजदूरों को दोगुना मेहनताना देकर इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं।
कार्रवाई में डर
रात में रहते हैं माफिया सक्रिय