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डाउनलोड करेंभास्कर न्यूज - राजिम
यहां होने वाला राजिम कुंभ मेला इस बार 14 फरवरी माघ पूर्णिमा से प्रारंभ होगा। जो महाशिवरात्रि 27 फरवरी तक चलेगा। मेला प्रारंभ होने में अभी 20 दिन ही बचे है। पहले दोनों विभाग एक ही मंत्री के पास थे। इस बार संस्कृति विभाग बृजमोहन अग्रवाल को तथा पर्यटन विभाग अजय चंद्राकर को दिया गया है। दो मंत्रियों के बीच का मामला होने के कारण राजिम कुंभ की तैयारी में लोगों का मानना है कि शायद खलल पड़ गया है।
दावा किया जा रहा है कि राजिम कुंभ के मेले में 20 लाख से अधिक श्रद्धालु राजिम पहुंचते है। इसके चलते बड़े पैमाने पर तैयारियां करनी होती है। एक माह पूर्व ही पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री नागरिकों, साधु संतों व विभिन्न शासकीय विभागों के उच्चाधिकारियों की बैठक लेकर चर्चा कर दिशा निर्देश देते हैं। विगत 10 वर्ष से संस्कृति व पर्यटन रहे मंत्री श्री अग्रवाल इस पर तन्मयता के साथ ध्यान देते थे।अभी तक इस विषय में मंत्रियों की कोई बैठक राजिम में नहीं ली गई है। इसके चलते विभिन्न विभागों के अधिकारी भी काम के प्रति जोश नहीं दिखा रहे हैं।
गरियाबंद जिलाधीश हेमंत पहारे व एसपी अभिषेक पाठक ने एक बैठक ली है, जो पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। राजिम कुंभ जिस तरह से तीन नदियों पैरी, सोंढूर व महानदी के संगम में होता है। उसी तरह यह क्षेत्र भी गरियाबंद, धमतरी व राजिम तीन जिले के एरिया में पड़ता है। इसके चलते जब तक मंत्री बैठक लेकर सक्रिय नहीं होंगे तब तक तीनों जिलों के जिलाधीश एवं जिला प्रशासन हरकत में नहीं आएगा। हमारे प्रतिनिधि ने गुरुवार को संगम नदी के मेला स्थल का मुआयना किया तो वहां केवल समतलीकरण ही हुआ है।
सड़कों का काम प्रारंभ नहीं हुआ है। नदी की रेत में बेशरम की झाडिय़ों के ऊपर मुरम डालकर 9 से 12 किमी सड़क बनाई जाती है। तीन जिलों के लोनिवि उपसंभाग के अधिकारी इस कार्य को अंजाम देते हैं। सड़क बिछाने के बाद ही अन्य विभागों के वाहन नदी तट तक पहुंच पाएंगे। इसीलिए सड़क बिछाने की प्रतीक्षा की जा रही है। लोनिवि उपसंभाग राजिम रेत के समतलीकरण ठेकेदार से करवा रहा है। वही अभनपुर व कुरुद ने अभी तक मेलास्थल का मुआयना नहीं किया है। अलबत्ता लोस्वायां विभाग ने नदी के आस पास पेयजल के लिए बोर कराने का काम प्रारंभ कर दिया है। टायलेट व पाइप लाइन अंदर की गलियों में बिछाया जा रहा है। प्रमुख मार्गों में सड़क की चौड़ाई के हिसाब से पाइप डाला जाएगा। लोस्वायां विभाग के एसडीओ एलएन साहू ने बताया कि यहां पर 280 शौचालय बनेंगे। इसमें संत समागम स्थल में साधु-संतों की झोपड़ी में अटैच्ड होंगे। दस हजार मीटर पाइप लाइन बिछाकर लोगों को जल आपूर्ति की जाएगी। मेलास्थल पर300 स्टैंड पोस्ट भी लगेगा। 30 पानी की टंकियां लगाई जाएगी। जिससे चौबीसों घंटे पानी की आपूर्ति की जाएगी। वन विभाग के रेंजर एमसी धौरे ने बताया कि साधु संतों की कुटिया निर्माण के लिए घास पूस ढूंढा जा रहा है। जलाऊ लकड़ी भी मंगाई गई है। 25 हजार बांस, दो हजार बल्लियां, 2200 खूंटा उपलब्ध कराया जाएगा। सड़क बनते ही मेला स्थल पर भेजा जाएगा। मेला स्थल में कितने दाल भात सेंटर खुलेंगे अभी तक तय नहीं है। न ही इसके लिए चावल मंगाया गया है।
लाइटें लगाने का काम अभी तक पड़ा है अधूरा
विद्युत विभाग कहां-कहां पर लाइट लगाएगा यह काम भी अभी अधूरा है। मेला स्थल को लो वोल्टेज व बिजली गुल होने की समस्या से निजात दिलाने अतिरिक्त ट्रांसफार्मर मंगाया जाता है। उक्त जानकारी देते हुए विद्युत विभाग के जेई एमके शुक्ला कहा कि जरूरत के मुताबिक सामान जुटाया जाएगा। कुंभ मेला स्थल पर डाक्टरों की टीम, दवाइयों का स्टाक व एंबुलेंस भी रखा जाना है। जल संसाधन विभाग द्वारा साधु संतों के शाही स्नान के लिए कुंड निर्माण प्रारंभ नहीं हुआ है। वहीं श्रद्धालुओं के लिए भी स्नान कुंड बनाया जाना है। बहरहाल समय कम है और काम ज्यादा इस लिहाज से तीनों जिलों के प्रशासन की तैयारियों में तेजी लाने की जरूरत है।
तैयारी धीमी
कुंभ को लेकर अब तक नहीं हुई राजिम में तैयारी बैठक, मेला माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चलेगा, करीब 20 लाख लोग पहुंचते हैं कुंभ में
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