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अस्पताल दर अस्पताल 3 घंटे तक प्रसव पीड़ा झेलती रही प्रसूता

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - तिल्दा-नेवरा
एक तरफ सरकार संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित कर रही है और इसके लिए जननी सुरक्षा योजना चला रही है जिसके प्रचार-प्रसार पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य कर्मचारी ही इस योजना का मखौल उड़ा रहे हैं। ऐसे ही एक हादसे की शिकार बनी एक प्रसूता रेनू निषाद जो अब स्वास्थ्य है लेकिन अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही उसकी जान भी जा सकती थी।
एक गरीब महिला गुरुवार को प्रसव के लिए सरकारी अस्पताल पहुंची तो नर्स ने हाई रिस्क केस बताकर लौटा दिया। फिर वह मिशन हास्पिटल गई तो वहां भी कोई डाक्टर नहीं था। वह प्रसव पीड़ा से कराहती तीन घंटे तक एंबुलेंस में इस अस्पताल से उस अस्पताल चक्कर लगाती रही। अंत में एक निजी नर्सिंग होम में सामान्य प्रसव हुआ, जहां उसने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। हादसे का लब्बोलुआब ये है कि ठीक एक दिन बाद गणतंत्र का पर्व मनाया जाएगा और तंत्र की विफलता से आज भी गण ठगा सा महसूस कर रहा है।
वार्ड-16 नेवरा निवासी रानू निषाद ((25)) इतनी गरीब है कि गर्भवती होने के बावजूद उसे मजदूरी करना पड़ रहा था। वह गुरुवार की शाम मजदूरी करके घर लौटी। शाम करीब 6 बजे उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई उसके परिजनों ने 102 डायल कर महतारी एक्सप्रेस को बुलवाया। कुछ देर में महतारी एक्सप्रेस उसके घर पहुंची और उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, महिला को महतारी एक्सप्रेस से उतारकर अस्पताल में भर्ती कराने के लिए ले जाया गया लेकिन ड्यूटी पर तैनात नर्स सुमन साहू ने उसे यह कहकर भर्ती करने से मना कर दिया, महिला की ऊंचाई कम है। इस कारण यह केस हाई रिस्क का हो सकता है। अस्पताल में कोई महिला डॉक्टर नहीं है, इसलिए मैं रिस्क नहीं ले सकती जबकि महिला प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। परिजनों ने उसकी हालत देख नर्स से बार-बार गुहार लगाई कि कुछ भी हो, इसे भर्ती कर लो लेकिन नर्स ने एक नहीं सुनी और भर्ती करने से मना कर दिया। परिजन उसे सरकारी एंबुलेंस से मिशन अस्पताल ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में पडऩे वाला रेलवे फाटक बंद था। करीब बीस मिनट इंतजार के बाद फाटक खुला और एंबुलेंस मिशन हास्पिटल पहुंची। दर्द से कराहती महिला को जैसे-तैसे एंबुलेंस से उतारकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां के स्टाफ ने डिलीवरी की तैयारी भी शुरू कर दी थी। शेष पेज २३ पर
इस बीच डॉक्टर को बुलाया गया तो पता चला कि डॉक्टर नहीं है। करीब आधे घंटे बाद वहां से महिला को किसी और हास्पिटल ले जाने को कहा गया। तब तक सरकारी एंबुलेंस चली गई थी। परिजनों ने निजी एंबुलेंस की और फिर यह सोचने लगे कि अब कहां ले जाना है। तभी कुछ लोगों ने निजी नर्सिंग होम ले जाने का सुझाव दिया। परिजन उसे निजी नर्सिंग होम ले जा रहे थ तभी रेलवे फाटक फिर बंद मिला। फिर करीब 15 मिनट इंतजार के बाद फाटक खुला तब एंबुलेंस सांई हास्पिटल पहुंची। वहां करीब 9 बजे महिला का सामान्य प्रसव हुआ। सांई हास्पिटल के डॉ. खुमान सिंह ने बताया कि महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।




॥इस मामले की मुझे कोई जानकारी नहीं है। रहा सवाल महिला को अस्पताल से वापस करने का तो मैं इसके बारे में ड्यूटी कर रही नर्स से जानकारी लूंगा। यदि उसने बिना वजह महिला को वापस किया होगा तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। यहां महिला डॉक्टर नहीं होने से परेशानी हो रही है।॥

डॉ. जीआर अग्रवाल,

मेडिकल आफिसर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तिल्दा

सरकारी अस्पताल का 8 माह से बुरा हाल

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहले डॉ. मीरा बघेल और डॉ. मीना सेमुअल पदस्थ थीं। तब यह अस्पताल नसबंदी और प्रसव के लिए प्रसिद्ध था। यहां रिकार्ड नसबंदी और प्रसव होते थे। आठ माह पहले इन दोनों डॉक्टरों का तबादला हो गया, तब से इस अस्पताल का बुरा हाल है। कोई नई महिला डॉक्टर पदस्थ नहीं की गई है, जिससे यहां नर्स और दाइयों के भरोसे डिलीवरी हो रही है। यदि सामान्य डिलीवरी हो गई तब तो ठीक है, लेकिन सीजेरियन होने पर विकट स्थिति का सामना करना पड़ता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जगह-जगह वाल पेंटिंग की गई है, जिसमें संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करने वाले नारे लिखे गये हैं, लेकिन उसी अस्पताल का बुरा हाल है। सरकारी अस्पताल की इस अव्यवस्था से निजी नर्सिंग होम संचालकों को लाभ पहुंच रहा है।

डाक्टर के कहे बगैर लिख दिया हाई रिस्क

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की नर्स ने गर्भवती महिला को लौटाने के बाद अस्पताल की रजिस्टर में हाई रिस्क केस लिख दिया। इसकी जानकारी अस्पताल के डॉक्टरों को नहीं दी। जब मीडिया ने मामले की जानकारी के लिए डॉक्टर से बात की तो डॉक्टर ने रजिस्टर चेक किया, तब डॉक्टर को पता चला कि हाई रिस्क का मामला था।