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शुध्द पेयजल तक तो नहीं मिलता राजिम के लोगों को
राजिम. गणतंत्र दिवस की 64 वीं वर्षगांठ मना रहे है, तंत्र से जुड़े नेताओं, अफसरों, कर्मचारियों व अमीरों को भले ही लगे कि देश प्रदेश व गांवों में सुशासन है, पहले से बेहतर सुविधाएं लोगों को मिल रही हैं, लेकिन गण को लगता है कि जरूरी सुविधाएं उसे अब भी नहीं मिल रही हैं। पानी, बिजली, शिक्षा, रोजगार व उपचार के लिए उसे तरसना पड़ता है। आबादी बढऩे के साथ ही पानी की सुविधा भी बढऩी चाहिए लेकिन कई वार्डों व मोहल्लों में नहीं बढ़ी। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
वार्ड 5,6,7,14,15 में पानी की समस्या है। नलों के सामने महिलाओं की भीड़ लगी रहती है, पानी आसानी से नहीं मिलता। अंबिका, किरण, सरस्वती, सविता, राधाबाई, बबिता देवी ने बताया कि नल में सुबह शाम एक घंटा ही पानी आता है, सभी को इसी दौरान घर की जरूरत का पूरा पानी भरना होता है, लेकिन एक तो समय कम उस पर मुसीबत नल की पतली धार। एक गुंडी भरने में ही 10 मिनट लग जाता है, सारे लोग पानी भर सके इससे पहले नल बंद हो जाता है। जनप्रतिनिधियों को पानी का दवाब बढाने और शेष पेज 23 पर
समय एक घंटे की जगह दो तीन घंटा करने ध्यान देना चाहिए लेकिन कोई ध्यान नहीं देता है। नदी में पानी रहता है तो लोग निस्तारी करते हैं लेकिन नदी सूखी रहती है तो निस्तारी पानी के लिए अतिरिक्त श्रम करना पड़ता है।
न जमीन न मकान : सड़क किनारे झोपड़ी बनाकर रहने वालों की तंत्र से शिकायत है कि वह उन्हें रहने के लिए जमीन तो देता नहीं है, लेकिन कहीं किसी तरह झोपड़ी बनाकर रहते हैं तो झोपड़ी हटाने नोटिस देता रहता है। सड़क किनारे झोपड़ी बनाकर रहने वाली बेसहारा महिलाएं समारिन बाई देवांगन, श्यामाबाई विश्वकर्मा, दुकाला सतनामी का पीड़ा है कि रहने के लिए न अपनी जमीन है, न अपना मकान। सड़क किनारे लंबे समय से झोपड़ी बनाकर रही है, अब यहीं पर अधूरा नाला बना दिया गया है और हम लोगों को नपं प्रशासन ने झोपड़ी हटाने का नोटिस दे दिया गया है। कहीं हमें रहने के लिए जमीन दी जाए या योजना के तहत मकान बनाकर दिया जाए, लेकिन कई बार जनप्रतिनिधियों से मांग करने के बाद भी हमारी बात कोई सुनता नहीं है। यातायात सुविधा का हाल भी बद से बदतर होता जा रहा है, सड़क पर यातायात बढ़ता जा रहा है, वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन न सड़कें चौड़ी की जा रही हैं, न यातायात सुगम करने कोई प्रयास किया जा रहा है। पर्यावरण का हाल यह है कि सड़क पर लोग और मोहल्ले में मिलों के धुएं से रहना मुश्किल हो गया है।
स्मार्ट कार्ड है, उपचार नहीं : सुहेला. नगर सहित गांव के लोगो की अपनी परेशानी है। कुछ लोगों के लिए स्थिति बदली नहीं है, बल्कि बदतर ही हुई है। हिरमी के गरीब मुकेश शिवारे का कहना है कि सरकारी योजना के तहत स्मार्ट कार्ड तो मिल गया है, वह अपनी पत्नी की डिलवरी के लिए भाटापारा, तिल्दा, बलौदाबाजार जा चुका है, लेकिन ऐसा अस्पताल नहीं है जो उसकी पत्नी की डिलवरी स्मार्ट कार्ड के आधार पर कर सके। कल वह फिर तिल्दा के मिशन अस्पताल पता करने जाएगा। झीपन के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पत्नी की डिलवरी के आए ग्रामीण नरेश((बदला हुआ नाम)) ने बताया कि अस्पताल में दवा नहीं होने के कारण मेडिकल में लेने आया हूं। बासीन के जतीराम यादव का कहना है कि जबसे महिलाओं को मुखिया बनाकर राशन कार्ड दिया गया है, हमें राशन नहीं मिल रहा है जबकि पहले मेरे नाम से राशन कार्ड था तो मेरे को राशन मिलता था।
पढऩा तो चाहते हैं लेकिन... : संजू यादव, लेखराम निषाद, मनोज पाल, चेतन यादव आदि ऐसे ही बच्चे हैं जो पढऩा चाहकर भी नहीं पढ़ पा रहे हैं। किसी के माता पिता काम करने नानी के पास छोड़कर चले गए हैं तो कोई घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पढऩा छोड़कर काम कर रहे हैं। कई ऐसे भी है जो पढ़ाई के साथ ही पार्ट टाइम काम कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रोजगार आसानी से मिले तो बच्चों की पढ़ाई तो हो सकती है, लेकिन इस ओर गांव के जनप्रतिनिधि ध्यान नहीं देते हैं।
सड़क, बिजली का बुरा हाल : लवन. गणतंत्र में लोगों को सड़क, बिजली पानी की सुविधा तो मिलनी चाहिए लेकिन क्षेत्र के लोग इसके लिए परेशान हैं। लवन लगभग 50 गांवों का केंद्र है लवन, 20-25 पहुंच मार्गों से लोग लवन आते हैं। ज्यादातर सड़कों की हालत खराब है, लोगों को गांव से लवन आने-जाने में दिक्कत होती है। लोग धरना, चक्काजाम, चुनाव बहिष्कार सब कर चुके लेकिन कोई हल नहीं निकला। पहले जितनी दिक्कत थी आज भी उतनी ही है। बिजली सुविधा का हाल यह है कि कई गांवों में बिजली नहीं है, तथा जहां है वहीं हमेशा नहीं रहती है। शिक्षा का यह हाल है कि एक छात्रा से पूछा कि गणतंत्र दिवस क्यों मनाते हैं तो वह बता नहीं सकी।