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बलौदाबाजार जिला बना लेकिन सुविधाएं नदारद
बलौदाबाजार. रविवार को देश में चारों ओर गणतंत्र की धूम मची रहेगी परंतु आजादी के बाद आज भी लोगों को साफ पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय में शिक्षा का स्तर लगातार कमजोर होता जा रहा है।
आंकड़ों में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रतिशत तो बढ़ रहा है परंतु जिले के महाविद्यालयों में स्टाफ की कमी, स्कूलों में कमरों, शाला भवनों की कमी से विद्यार्थी परेशान हो रहे हैं। शासकीय डीके कालेज के छात्र गणेश शंकर साहू, अभिषेक पटेल, प्रणम्य पाण्डेय के अनुसार महाविद्यालय आज भी पुराने पैटर्न पर ही संचालित हो रहा है जबकि यहां नए-नए कोर्स प्रारंभ होने चाहिए। एर तरफ शिक्षा का ये हाल है तो दूसरी तरफ ग्रीष्मकाल में पेयजल का इंतजाम करना आज भी बड़ी चुनौती है। लगभग 30 वर्ष से भी प्राचीन योजना के जरिए शिवनाथ नदी का पानी उपलब्ध हो पाता है। प्रतिवर्ष ग्रीष्मकाल में नदी की धार कम होते ही पानी की सप्लाई बंद हो जाती है। पेयजल के बारे में नगर के डा. महेश केसरवानी ने कहा कि लोगों को साफ पेयजल मिलना उनका मौलिक अधिकार है शेष पेज 23 पर
जिसे हर हाल में पूरा करना चाहिए। नगर के लोगों को ग्रीष्मकाल में पांच-सात घंटे टैंकर का इंतजार करना पड़ता है। नगर का यह हाल है तो ग्रामीण इलाकों का क्या हाल होगा समझा जा सकता है। नगर के दिलीप हरिरमानी, पुरुषोत्तम सोनी, मधु सर्राफ के अनुसार भी नगरवासियों को मिलने वाले पेयजल की स्थिति बेहद खराब रहती है। गर्मियों में तो लोगों को टैंकर से खरीदकर पीने के लिए पानी लेना पड़ता है। ऐसी ही स्थिति स्वास्थय की है। जिला निर्माण के बाद लोगों को उम्मीद थी कि बलौदाबाजार का शासकीय चिकित्सालय की दशा सुधरेगी परंतु आज तीन साल बाद स्थिति जस की तस बनी हुई है। आपातकालीन स्थिति में यहां किसी प्रकार की सुविधाएं नहीं होने तथा समय पर चिकित्सकों के नहीं होने से लोगों को रायपुर, बिलासपुर की ओर भागना पड़ता है। चिकित्सालय पहुंची उर्वशी साहू, जानकी साहू, संध्या यादव ने बताया कि जिला मुख्यालय में महिला चिकित्सक नहीं हैं जिसकी वजह से महिला मरीज अपनी समस्या पुरुष चिकित्सकों को बताने में झिझकती हैं। विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने से भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।