लालटेन युग में आज भी जी रहे आदिवासी
गरियाबंद. आजादी के 64 वर्ष बाद भी अनेक गांव आज भी लालटेन युग में जी रहे हैं। स्पष्ट है कि गांव तक बिजली की रोशनी नहीं पहुंची। जिले में 671 गांव हैं जिसमें से वनग्राम होने के कारण 67 गांव में बिजली अब तक नहीं पहुंची है। सौर उर्जा की बिजली मुहैया कराने की योजना बनाई गई वह भी फेल हो गई है । गौरतलब है कि अभी भी ग्रामीण क्षेत्र बिजली के मामले में आत्मनिर्भर नहीं हो पाया है ।
उर्जा विकास निगम ने10 वर्ष पूर्व दर्जनों वन ग्रामों में सौर उर्जा की बिजली पहुंचाने की योजना बनाई किंतु समुचित देखभाल नहीं होने के कारण गांव अब अंधेरे में डूबा रहता है । जुगाड़ ,जांगड़ा ऐसे ग्राम हैं जहां के सौर उर्जा प्लेट ही चोरी हो गई।
अनेक जगह तो बैटरी खराब है। पहाड़ी में बसे ताराझर ऐसा गांव है जो बिजली को तरस रहे हैं। क्रेडा के सहायक अभियंता इंद्रभूषण साहू ने बताया कि जिले में कामरभौदी और छिदौला में इसी वर्ष सौर उर्जा की बिजली पहुंचाई गई है। इसके अलावा योजना के तहत ग्राम कोचेना के तालापारा में सौर उर्जा से बिजली लगाने की तैयारी है। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में लगे सौर उर्जा क ी बिजली जिन गांवों में बंद है वहां सर्वे किया जाएगा।
मौलिक अधिकार बनाम गणतंत्र
रविवार. २६ जनवरी, २०१४