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न फर्म...न खरीदार...सादे कागज में बिल...राशि डकारने की तैयारी

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - महासमुंद
राजीव गांधी शिक्षा मिशन की बालिका शिक्षा योजना मद को हड़पने के लिए मिशन के कर्ताधर्ता व्यापक फर्जीवाड़े पर उतारू हो गए हैं। चिरको में चलाए जा रहे कौैशल विकास प्रशिक्षण के लिए संकुल समन्वयक ने सामान खरीदी का बिल प्रस्तुत किया है जिसमें कागजी घालमेल स्पष्ट उजागर हुआ।
चिरको प्रशिक्षण की जांच के लिए पहुंची राजीव गांधी शिक्षा मिशन की टीम ने पाया कि प्रशिक्षण की राशि को हथियाने के लिए संकुल समन्वयक और बीआरसीसी ने जो बिल सबमिट किए हैं उनमें न तो फर्म का नाम है और न ही खरीददार संस्था का कोई नाम पता। सादे कागज में बिल बनाकर राशि डकारने की तैयारी में लगे दोनों ही अफसरों को हालांकि दैनिक भास्कर में घोटाले की खबर प्रकाशित करने के बाद निलंबित कर दिया गया है, लेकिन अभी तक इस दिशा में कार्रवाई का अभाव मिल रहा है कि आखिर आर्थिक गड़बड़ी करने वाले अफसरों के खिलाफ आर्थिक अपराध की कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।
जांच में इस बात का खुलासा सर्वशिक्षा अभियान के संयुक्त संचालक एचआर शर्मा और सहायक कार्यक्रम समन्वयक बीडी सिंह ने प्रतिवेदन के जरिए किया है कि प्रशिक्षण के लिए जिन सामग्रियों की खरीदी बताई जा रही है वह मौके पर मौजूद नहीं मिला। सामान खरीदी का जो बिल दिया गया है वह सादे कागज में है और बीआरसीसी ने कभी भी खरीदी के लिए न तो क्रय समिति और न ही कोटेशन की आवश्यकता महसूस की है। सादे कागज में बिल बनाकर राशि डकार ली गई है।



13 जनवरी के अंक में एक और घोटाला कागजों पर ही छात्राओं को ट्रेनिंग शीर्षक से दैनिक भास्कर ने राजीव गांधी शिक्षा मिशन की बालिका शिक्षा प्रोत्साहन योजना में बरती जा रही भारी गड़बड़ी को उजागर किया। मामले में एपीसी ((बालिका शिक्षा)) समेत महासमुंद बीआरसीसी और चिरको के संकुल समन्वयक को सस्पेंड किया गया है। वहीं मामले में तीन अन्य अफसरों को भी शोकाज जारी कर कार्रवाई शुरू की गई है।

सस्पेंड किया लेकिन आर्थिक अपराध पर एफआईआर नहीं : चिरको प्रशिक्षण मामले में आर्थिक अपराध को जांच अधिकारियों एवं प्रशासनिक महकमे के द्वारा नजरअंदाज किया जा रहा है। संपूर्ण खुलासे के बाद यह तथ्य स्पष्ट हो गया था कि छह महीने तक बीआरसीसी ने सरकारी धन को अपने पास रख स्वहित में बेजा उपयोग किया है।

यह है सामानों की कीमत

सीआरसीसी कुबेर साहू के पास से जो सादे कागज का बिल व्हाउचर जांच अधिकारियों ने हासिल किया है उसमें धागे की कीमत सौ रुपए, टेप की कीमत 90 रुपए, गोल्डन चार्ट पेपर की कीमत 120 रुपए बताई गई है। मार्केट में इन सभी सामानों की कीमत अधिकतम 10 से 15 रुपए बताई जा रही है। वहीं सिलाई मशीन में लगने वाली सुई की कीमत 300 रुपए और यहां उपयोग की जाने वाली कैंची की कीमत 350 रुपए बताई गई है। सिलाई मशीन में लगने वाले धागे की एक गड्डी संकुल समन्वयक ने 450 रुपए में खरीदना बताया है। बाकी बिल प्रस्तुत ही नहीं किया है।

चिरको गांव में आयोजित राजीव गांधी शिक्षा मिशन की बालिका शिक्षा योजना में गड़बड़ी का एक और पक्ष उजागर, सामान कब और कहां के लिए खरीदा किसी को पता नहीं

भास्कर ने पहले ही उजागर किया था योजना का व्यापक फर्जीवाड़ा