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65 सालों से तमोरा में होता है बापू का श्राद्ध और मुंडन, लगता है मेला

7 वर्ष पहले
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नीरज गजेंद्र - महासमुंद
महासमुंद जिले के बागबाहरा ब्लॉक के गांव तमोरा में तैयारियां चल रही हैं बापू के श्राद्ध की। 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर हर साल की ये परंपरा है। 65 सालों से लगातार ये सिलसिला चल रहा है। पूरे गांव में साफ-सफाई हो रही है। मेले की तैयारियां चल रही है। गुरुवार को पूजा-पाठ के बाद बुजुर्ग मुंडन कराएंगे और बापू को याद करेंगे। देश में ये अपनी तरह का पहला गांव है, जो महात्मा गांधी की पुण्यतिथि इस तरह से मनाता है। गांव के लोग वैदिक रीति रिवाजों को पूरा करेंगे। तालाब में पानी देने जाएंगे, जो यहां की एक परंपरा है। मृत्युभोज होगा और फिर लगेगा गांधी मेला। पैसे भी बहुत खर्च होंगे। तकरीबन चार से पांच लाख। इसके लिए गांव के हर घर से चंदा होता है। 160 घर हैं गांव में। आबादी करीब 2000 की। बताते हैं कि 30 जनवरी 1948 को जब बापू की हत्या हुई, तो 10 दिनों तक तो शोक में गांव के किसी घर में खाना तक नहीं बना था। उसके बाद से हर साल 30 जनवरी को बापू का श्राद्ध गांव में मनाने का सिलसिला जारी है।

आज तक रुका नहीं है।




पुण्यतिथि पर भास्कर विशेष

बंद हो गईं शराब दुकानें

गांव के संतराम पटेल ने बताया कि गांव के लोग शराब और मांस से दूर हैं। कई बार शराब की दुकानें खुलीं, लेकिन ग्राहक ही नहीं मिले। दुकान अपने आप बंद हो गईं। यह भी अपनी तरह का अलग ही सत्याग्रह था।



मानते हैं गांधी का वंशज

महात्मा गांधी यहां कभी नहीं आए। लेकिन गांव के लोग खुद को उनका वंशज मानते हैं। सत्याग्रह का बापू का संदेश इस गांव में 1930 में पहुंचा था। बापू के नेतृत्व में चले नमक सत्याग्रह के बाद छत्तीसगढ़ के चमसूर में नहर सत्याग्रह हुआ।

चल रही लिपाई-पोताई

घरों में लिपाई-पुताई चल रही है। सड़कों और गलियों की सफाई भी जारी है। बरसी में शामिल होने आसपास के गांवों में न्यौता भेजा जा चुका था। हर घर से पांच-पांच सौ रुपए सहयोग राशि ली गई है। संपन्न लोग इसमें अधिक दान करते हैं।