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महा सोमयज्ञ आज से, भव्य पंडाल का निर्माण

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - राजिम
प्रदेश में प्रथम बार 6 दिवसीय महा सोमयज्ञ का आयोजन गुरुवार 30 जनवरी से प्रारंभ हो रहा है जिसका समापन 4 फरवरी को बसंत पंचमी के दिन होगा।
महा सोमयज्ञ की तैयारियां मेला मैदान में जोर शोर से की जा रही हैं। इसके लिए मैदान में 120 फीट बाय 120 का भव्य पंडाल बनाया गया है। यज्ञकर्ता श्रीनिवास सत्री हैदराबाद से राजिम पहुंच गए हैं। वे यज्ञस्थल पर पहुंचकर तैयारियों का जायजा लेते रहे। महाराष्ट्र के अकलकोट शिवपुरी धाम से सभी गजानंद महाराज के अनुयायी यज्ञ के लिए बड़ी संख्या में राजिम पहुंचे हैं। हिमालय से प्राप्त सोमलता के फलों का रस निकालकर उसे सीधे हवन कुंड में डाला जाता है। यज्ञ के लिए 150 किलो घी व 10 टन लकडिय़ों की आवश्यकता होगी। बताया जाता है सोमयज्ञ के प्रभाव से 100 वर्ष तक वातावरण में शुद्धता, प्राणियों में सुख समृद्धि एवं शांति का वातावरण रहता है।
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यज्ञकर्ता श्रीनिवास ने बताया कि गजानंद महाराज ने प्रथम बार स्वयं सन 1969 में अकलकोट शिवपुरी में यज्ञ किया था। इसके बाद अब तक 25 विभिन्न स्थानों पर यज्ञ हो चुका है। इसका आयोजन हाल ही में काडमांडू में किया गया, यज्ञ के दौरान प्रवग्र्य विधि से 400 ऋचाएं पढ़ी जाएंगी। इसके साथ ही महावीर पात्र में गाय का घी गरम किया जाता है। इस पात्र में गाय व बकरी का दूध निकालकर इसकी मंत्रों सहित यज्ञ में आहुति दी जाएगी। यज्ञ कुंड से आहुति की ज्वाला ऊंची उठेगी। यज्ञ में दूध की आपूर्ति के लिए पांच गायें एवं दो बकरियां बंधी रहेंगी।




आज मंडप प्रवेश व गणेश पूजन

यज्ञ प्रतिदिन सुबह 9 बजे से रात्रि 8 बजे तक होगा, इस दौरान हवन पूजन भी होगा। सोमयज्ञ का उद्घाटन 30 जनवरी गुरुवार को होगा। गुरूवार को मंडप प्रवेश, गणेश पूजन, वेदी पूजन तथा पहला प्रवग्र्य होगा। 31 जनवरी को प्रवग्र्य व वेद पठन होगा, 1 फरवरी को वेद पूजन, वेद पठन, प्रवग्र्य होगा। इसी प्रकार 2 फरवरी प्रवग्र्य व वेद पठन, 3 फरवरी को वेद पूजन, पठन, प्रवग्र्य तथा शाम को सायंकाल में पूर्णाहुति होगी। 4 फरवरी को अवभूत स्नान होगा। इसके अतिरिक्त गणेश यज्ञ, लक्ष्मी यज्ञ, मृत्युंजय यज्ञ, गायत्री यज्ञ तथा प्रतिदिन कीर्तन नाम स्मरण का आयोजन होगा।