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हल्बी-गोंडी की वर्णमाला हुई तैयार, होगी पढ़ाई

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - दंतेवाड़ा

दक्षिण बस्तर के ग्रामीण इलाकों में छात्र-छात्राएं मातृबोली हल्बी व गोंडी में पढ़ाई की शुरूआत करेंगे। दोनों बोलियों में पाठ्य सामग्री तैयार कर ली है।

आरजीएम में बतौर एपीसी कार्यरत सिकंदर खान की लिखी किताबों का विमोचन ३१ जनवरी को रंगीला बाल महोत्सव में पहुंच रहे सीएम सीएम डॉ रमन सिंह करेंगे।

१२१ स्कूलों का चयन : शुरूआती तौर पर १२१ स्कूलों का चयन किया गया है। बोली के जानकार १-१ शिक्षक बाकायदा इसकी ट्रेनिंग भी ले रहे हैं।



बनी वर्णमाला

दादा जोकाल के नाम से मशहूर सिकंदर खान ने ३ साल पहले गोंडी वर्णमाला चार्ट तैयार किया था। इसमें देवनागरी लिपि का इस्तेमाल होगा, लेकिन शद गोंडी व हल्बी के होंगे। कक्षा पहली से शुरूआत की जाएगी, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर पांचवीं कक्षा तक लागू किया जाएगा। कलेक्टर केसी देवसेनापति के मुताबिक अपनी मातृबोली में बच्चे बेहतर ढंग से सीखेंगे और भावों की अभिव्यक्ति कर सकेंगे। राष्ट्रभाषा हिंदी की पढ़ाई भी जारी रहेगी, लेकिन अंग्रेजी, गणित, विज्ञान जैसे कठिन विषयों को समझाने हल्बी-गोंडी बोली की मदद ली जाएगी।

बड़े भी सीखेंगे

कलेक्टर के मुताबिक तैयार पाठ्यक्रम बच्चों ही नहीं, बल्कि बड़ों के लिए भी उपयोगी साबित होगा। शासकीय योजनाओं की जानकारी देने और ग्रामीण जनों से संवाद में लोकबोली की अहम भूमिका होती है। हल्बी टू हिंदी/इंग्लिश और गोंडी टू हिंदी/इंग्लिश की पाठ्यसामग्री तैयार करने में दादा जोकाल व आरजीएम की टीम ने काफी मेहनत की है।





१२१ स्कूलों में नए सत्र से होगी शुरुआत, इससे पहले भी बस्तर की हल्बी-भतरी, दोरली में पाठ्य पुस्तकें हो चुकी हैं तैयार