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धान लेने के पहले किसानों से करा रहे मजदूरी

7 वर्ष पहले
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आधे से ज्यादा बोरे फटे पुराने मिल रहे, बारदाने की शार्टेज से बढ़ी किसानों की मुसीबत।

भास्कर न्यूज - धमतरी

समर्थन मूल्य में धान बेचना किसानों को भारी पड़ रहा है। सोसाइटी में इनसे मजदूरी कराई जा रही है। बारदाना शार्टेज के चलते किसानों को फटे पुराने बारदाने दिए जा रहे हैं। इन बारदानों को समिति द्वारा सिलवाने के बजाए किसानों से ही सिलवा रहे, इससे किसानों में भी आक्रोश है।

सोसाइटियों में महीने भर से बारदाने की किल्लत है। बारदानों की कमी के कारण किसानों को अपना धान सोसाइटी में ही रखना पड़ रहा है। शार्टेज को देखते हुए मार्कफेड ने फटे पुराने बारदानों का उपयोग करने कहा है, इससे किसानों पर आफत आ गई है। सोसाइटी प्रबंधक इन्हीं बारदानों को सीधे किसानों को दे रहे हैं। धान बेचने के पहले इन्हें फटे बारदानों की सिलाई करनी पड़ रही। सोरम सोसाइटी के प्रबंधक केआर साहू का कहना है कि वर्तमान में यहां चार हजार बारदाने हैं, इनमें से तीन हजार अनुपयोगी हंै। इन्हीं बारदानों को छंटवाकर उपयोग करा रहे। पहले मार्कफेड ने फटे बारदानों को अलग रखने आदेशित किया था, अब इनका उपयोग करने कहा गया है। लोहरसी सोसाइटी में फटे बारदानों को सिलाई कर उपयोग में लाया जा रहा है।

आधे फटे मिल रहे

सोरम सोसाइटी में धान बेचने पहुंचे भटगांव निवासी जागेश्वर साहू ने बताया कि वे 23 बोरा धान बेचने लाए हैं। सोसाइटी से उसे जो बारदाने दिए गए हैं, उसमें से आधे फटे हुए है, जिसकी सिलाई उन्हें ही करना पड़ रहा है। फटे बारदाने देकर किसानों की समस्या बढ़ाई जा रही है। रुद्री निवासी अनिश साहू ने बताया कि वह 100 बोरा धान लाया है। आधा बोरा उसे भी फटा हुआ मिला है, जिसके कारण धान भरने में भारी परेशानी हो रही है। श्यामतराई से पहुंची ओमेश्वरी साहू ने बताया कि वह 20 बोरा धान लेकर पहुंची। सोसाइटी में जो बारदाने मिले हैं, सभी फटे हुए हैं। गोकुलपुर का रवि साहू 60 बोरा धान लाया था, उसे भी घटिया बारदाने दिए गए।

किसानों का कहना था कि बारदानों के शार्टेज की समस्या उन पर थोपी जा रही है। मजबूरी में उन्हें खुद सिलाई कर धान भराई करना पड़ रहा। बारदाने कई जगह से फटे है, जिसके कारण समय बर्बाद हो रहा है।



धमतरी. धान खरीदी केंद्र सोरम में धान से भरे फटे बारदाने। खरीदी केन्द्र में किसान जागेश्वर देवांगन फटे बोरे की सिलाई करते हुए।

आफत - फटे बारदानों को उपयोग करने के चक्कर में सोसाइटियों की मनमानी, भारी अव्यवस्था से किसान हो रहे परेशान

समितियों की जवाबदारी

॥फटे बारदानों को समिति वालों को सिलाई करने के बाद किसानों को देना है। किसान नहीं सिलेंगे, यह जवाबदारी समितियों को दी गई है। बारदाने का शार्टेज है। 250 गठान की डिमांड किए हैं। 170 गठान पहुंच गया है।ञ्जञ्ज सीआर जोशी, डीएमओ धमतरी

हफ्तेभर बाद हुई तौलाई

बारदाने का शार्टेज जिले के सभी सोसाइटियों में है। इसके कारण कई सोसाइटियों में तौलाई बंद हो गया था। लोहरसी में 22 जनवरी से बारदाने नहीं थे, यहां 28 जनवरी से तौलाई शुरु हुई। शंकरदाह में 20 जनवरी को बारदाना पहुंचा, तब यहां तौलाई शुरु हुई। ऐसा ही हाल अन्य सोसाइटियों का भी है। 15 फरवरी तक खरीदी होनी है, ऐसी स्थिति में बारदानों की समस्या आफत बन सकती है।