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बार विस्थापन का जंगल गांवों में अब शुरू हुआ विरोध

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - महासमुंद
बार नवापारा अभ्यारण्य के २२ में से २ गांवों का विस्थापन महासमुंद जिले के ग्राम चैनडीपा व विजेमाल में किया जा चुका है। जबकि नवापारा को ग्राम भावा के पास बसाने की तैयारी चल रही है। इसी तरह शेष १९ गांवों के ग्रामीण जिले के विभिन्न जंगलों में जगह तलाश कर चुके हैं। यदि उक्त सभी गांवों को महासमुंद जिले के जंगलों में बसा दिया जाएगा तो महासमुंद जिले में जंगल का नामों-निशान मिट जाएगा। बहरहाल ग्राम बार के ग्रामीण सोरम-सिंघी, मोहंदी व तरपोंगी के मध्य बीजा व मिश्रित प्रजाति के विशाल जंगल को पसंद भी कर चुके हैं। करीब २० की संख्या में सोमवार को पुन: उक्त जंगल को देखने पहुंचे तो वहां के ग्रामीणों ने इसका पुरजोर विरोध किया। जिसके बाद बार के उक्त ग्रामीणों को दबे पांव वापस लौटना पड़ा।
मिली जानकारी के अनुसार बार नवापारा में टायगर प्रोजेक्ट लागू किया जा रहा है। जिसके तहत वहां के सभी गांवों का एक-एक कर विस्थापन किया जा रहा है। बार अभ्यारण्य के ग्राम लाटादादर का विस्थापन सांकरा के पास चैनडीपा में किया गया है। जबकि रामपुर को विजेमाल में बसाया गया है। इसी तरह भारी विरोध के बाद भी नवापारा के ग्रामीणों के लिए भावा में खेत व मकान बनाया जा रहा है। वन विभाग की इस विस्थापन नीति के तहत १८ वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति को एक परिवार मान लिया जाता है और उसे ५ एकड़ में खेत व मकान बनाकर दिया जाता है। जिसके कारण उक्त गांवों के ग्रामीण शासन द्वारा दिए जा रहे इस लालच में आ रहे हैं। बहरहाल सोमवार को ग्राम पंचायत बार के ग्रामीण सरपंच रामचरण यादव, उप सरपंच रत्नेश त्रिपाठी, बार वन सुरक्षा समिति के अध्यक्ष सियाराम कैवर्त, साधुराम ध्रुव, पंचराम ठाकुर, सेवासिंह ठाकुर आदि की अगुवाई में मोहंदी, बेलर, तरपोंगी, सोरम-सिंघी के मध्य महासमुंद वन परिक्षेत्र के अंतर्गत कक्ष क्रमांक-३६ का निरीक्षण करने पहुंचे थे। पूछने पर उक्त ग्रामीणों ने कहा कि इसके पूर्व वे लोग ६-७ बार उक्त जंगल को देखकर जा चुके हैं तथा इसे वे पसंद कर चुके हैं। जिस पर ग्रामीणों के बुलावे पर पहुंचे जिले में चलाए जा रहे जंगल बचाओ आंदोलन के नेतृत्वकर्ता व वनोपज संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष हितेश चंद्राकर व ग्राम पंचायत मोहंदी के सरपंच खेमराज दीवान सहित अन्य ग्रामीणों ने भारी विरोध किया। हितेश चंद्राकर ने कहा कि पूरे जिले के संबंधित ग्रामों में जाकर वे बार के गांवों का महासमुंद के जंगल में बसाने का विरोध किया जाएगा।