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अंबुजा दुर्घटना की जांच रिपोर्ट का अता-पता नहीं
अभिषेक मिश्रा - बलौदाबाजार
अंबुजा सीमेंट संयंत्र हादसे के एक साल बाद भी न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है और न ही दुर्घटना के कारणों का खुलासा किया गया है। दुर्घटना के सप्ताह भर के अंदर की कलेक्टर राजेश सुकुमार टोप्पो ने दुर्घटना के लिए प्रशासन की ओर से जांच टीम गठित कर दुर्घटना की जांच प्रारंभ कर दी परंतु रिपोर्ट का अब तक अता-पता नहीं है। दुर्घटना के बाद कलेक्टर राजेश सुकुमार टोप्पो ने जांच कमेटी बैठाकर दुर्घटना के कारणों की जांच प्रारंभ करने के निर्देश दिए थे परंतु दुर्घटना को आज एक साल होने के बाद प्रशासन की जांच रिपोर्ट का कहीं अता-पता नहीं है।
आज तक यह निर्धारित नहीं किया गया है कि दुर्घटना की असली वजह क्या थी, दुर्घटना के लिए कौन-कौन से कारण जिम्मेदार थे, क्या दुर्घटना को टाला जा सकता था, दुर्घटना के लिए दोषी कौन है। साल भर बाद भी जांच रिपोर्ट की असलियत के सामने नहीं आने से समूची जांच प्रक्रिया भी संदेह के घेरे में आ जाती है। संयंत्र में आज भी ग्रामीण इलाकों के सैकड़ों मजदूर कार्यरत हैं तथा इस दुर्घटना से मजदूरों में भय व्याप्त है। अंबुजा सीमेंट संयंत्र के हादसे जैसे संवेदनशील मुद्दे की जांच रिपोर्ट के प्रति प्रशासन ने ढिलाई बरती है शेष पेज 1९ पर
तथा रिपोर्ट भी जनहित में सार्वजनिक नहीं की है।
कलेक्टर ने फोन नहीं उठाया : अंबुजा सीमेंट संयंत्र में हुई दुर्घटना की जांच के लिए कलेक्टर द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट के एक साल बाद तक सार्वजनिक नहीं किए जाने के संबंध में गुरूवार को कलेक्टर राजेश सुकुमार टोप्पो के मोबाइल नंबर 094060-66200 पर गुरूवार को सुबह से लगातार संपर्क किया गया परंतु कलेक्टर द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया।
क्या हुआ था एक साल पहले
दुर्घटना के जिम्मेदार कौन कब पता लगेगा?
सीमेंट संयंत्र के जानकारों के अनुसार सन् 1985 में निर्मित सीमेंट मिल की छत पर बिना किसी फाउंडेशन के तीन फ्लाई ऐश हापर का निर्माण किया गया था। उक्त फ्लाई ऐश हापर में दुर्घटना के समय क्षमता से अधिक फ्लाई ऐश भरा हुआ था। हापर में फ्लाई ऐश भरने का कार्य फ्लाई ऐश वाहक एक भारी विशेष वाहन से लाए गए फ्लाई ऐश से किया जाता था। वाहन के फ्लाई ऐश के कम्प्रेशर के द्वारा प्रवाहित कर पाइप के माध्यम से हापर तक पहुंचाया जाता था। इस प्रक्रिया में हापर में वाइब्रेशन ((कंपन)) होता था। लगातार कंपन के बाद हापर की वेल्डिंग लगातार कमजोर होती गई तथा वेल्डिंग तथा नट बोल्ट के सहारे खड़ा किया स्ट्रक्चर इससे लगातार कमजोर होता गया जिसकी वजह से हापर ढहकर सीमेंट मिल की छत को तोड़ता हुआ सीमेंट मिल के मोटर हाऊस पर गिर गया।
कंपनी की ओर से मुआवजा मिल गया
॥जनवरी 2013 में संयंत्र में हुई दुर्घटना में मृतक पांचों श्रमिकों के परिजनों को नियमानुसार मुआवजा आदि समय से प्रदान किया जा चुका है। पांचों श्रमिकों के परिजनों को संयंत्र में नौकरी भी प्रदान की गई है। विगत वर्ष की दुर्घटना काफी दुखदायी थी भविष्य में इस प्रकार की दुर्घटना को रोकने के लिए संयंत्र प्रबंधन द्वारा सेफ्टी पर लगातार कार्य किया जा रहा है।ञ्जञ्ज
बीसी पाण्डेय. यूनिट हेड, अंबुजा सीमेंट संयंत्र, रवान
31 जनवरी 2013 समय सुबह लगभग 10.45 बजे जोरदार धमाके के साथ अंबुजा सीमेंट संयंत्र की सीमेंट मिल के तीन हापर गिर गए। दुर्घटना होते ही समूचे संयंत्र में अफरा-तफरी मच गई। दुर्घटना में सीमेंट मिल तथा हापर में काम कर रहे 5 श्रमिकों की मौत हो गई। हालांकि दुर्घटना के मृतकों को मुआवजा तत्काल मिल गया और 3 मजदूरों के परिजनों को नौकरी भी, लेकिन दुर्घटना के लिए जिम्मेदार कौन, यह अब भी सवालों के दायरे में है। विदित हो कि अंचल की प्रमुख सीमेंट कंपनी अंबुजा ((होलसिम)) सीमेंट संयंत्र में गत 31 जनवरी को सुबह लगभग 10.45 बजे सीमेंट मिल के छत पर खड़े किए गए तीन फ्लाई ऐश हापर ढह गए थे जिसमें सीमेंट मिल व हापर में कार्य कर रहे दो नियमित कर्मचारी कमलेश्वर सिंह उम्र 46 वर्ष, सुरेश चन्द्र शुक्ला उम्र 46 वर्ष दो अप्रेंटिस रोशन लाल वर्मा उम्र 28 वर्ष, पोषण लाल वर्मा उम्र 24 वर्ष तथा एक श्रमिक दुर्गेश कुमार वर्मा उम्र 26 वर्ष की मौत हो गई थी। दुर्घटना होने के बाद आसपास के ग्रामीण इलाकों के सैकड़ों ग्रामीण द्वारा संयंत्र के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया था तथा रवान, अर्जुनी में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने चक्काजाम व धरना दिया था।