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सेवक बन पंच-परमेश्वरों ने पंचायतों को लूट लिया
भास्कर न्यूज - कांकेर
गांव की तस्वीर बदलने के लिए सरकार जिन पंच परमेश्वरों के हाथों में सरकारी खजाना सौंपा था, उसे उन्होंने ही लूट लिया। विकास के लिए मिली रकम को गोलमाल करने में जनता के इन प्रतिनिधियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। गांव के विकास का नारा देने वाले प्रत्याशियों को ग्रामीणों ने अपना सरपंच चुना और इनमें से अधिकतर सरपंच ग्रामीणों के सपनों को तोड़ते हुए अपने कार्यकाल में सिर्फ अपना आर्थिक विकास करने में जुटे रहे।
जिले के तीनों एसडीएम न्यायालय में पड़े 125 प्रकरण से पता चलता है कि जनता के सेवकों ने किस प्रकार अपने ओहदे का दुरुपयोग कर शासकीय राशि में हेराफेरी की है। ऐसे सरपंचों से वसूली करने में संबंधित विभाग के पसीने छूट गए तो उसने मामला न्यायालय में सौंप दिया। अब न्यायालय इनसे राशि जमा कराने कोशिश कर रही है।
इसी प्रक्रिया में राशि जमा नहीं करने वाले कुछ सरपंचों को जेल भेजा गया है तो कुछ की संपत्ति कुर्क कर दी गई। पंचायत व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायतों को सभी प्रकार के निर्माण कार्य से लेकर अन्य विकास कार्यों के लिए विभिन्न मदों से सरकार द्वारा राशि जारी की जाती है। कई सरपंचों ने अधिकारियों से मिली भगत कर निर्माण से लेकर तरह तरह के कार्यों के लिए सरकारी खजाने से ये रकम तो निकाली शेष पेज 18 पर
लेकिन कार्य किए बिना ही पूरी राशि हड़प ली। अधिकारियों ने भी आंख मूंदकर बिना किसी जांच पड़ताल के काम हुए बिना ही राशि जारी करने के लिए सहमति दे दी। अब ऐसे कार्यों की राशि की वसूलना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। जिले में 125 भूतपूर्व सरपंचों से 51 लाख रुपए की राशि वसूली के लिए प्रशासन की जद्दोजहद जारी है।
वसूली के लिए कोर्ट को सौंपे मामले
॥वर्तमान में जिले में 125 सरपंचों के खिलाफ राशि बकाया है। यह राशि अनियमितता या चार्ज नहीं सौंपने के कारण बकाया है। वसूली के लिए मामले संबंधित एसडीएम न्यायालय में सौंपे गए हैं। पूर्व में कुछ मामलों में कुछ सरपंचों को जेल भी भेजा गया है तथा कुछ की संपत्ति कुर्क की गई है। जिन सरपंचों की मृत्यु हो चुकी है उनके उत्ताराधिकारी से बकाया राशि वसूल की जाएगी।ञ्जञ्ज
आरके जैन, उप संचालक पंचायत एवं समाज सेवा
30 वर्षों से जारी है वसूली अभियान
कोयलीबेड़ा में सर्वाधिक मामले
प्रशासन को पूरे जिले में सबसे अधिक वसूली कोयलीबेड़ा जनपद पंचायत से करनी है। यहां कुल 45 मामले हैं जिसमें 25.80 लाख रुपए वसूल करना है। जिले की सभी पंचायतों में भी सबसे अधिक इसी जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत बेलगाल के 2009-10 के तत्कालीन सरपंच से 4.6 लाख रुपए वसूल की जानी है। वहीं सबसे कम मात्र दो प्रकरण कांकेर जनपद पंचायत में हैं। अंतागढ़ जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत बा्रेदानार में 1981-82 के दौरान रहे सरपंच के खिलाफ सबसे कम मात्र दो सौ रुपए बकाया राशि है। जिसे अब तक शासन को अदा नहीं की जा सकी है।
घोटाले बाज सरपंचों से प्रशासन पिछले तीस वर्षों से वसूली के लिए तकादा कर रहा है। जिले में 1983 से ऐसे घोटालेबाज सरपंचों से वसूली की प्रकिया जारी है। इन सरपंचों के खिलाफ जांच में अनियमितता बरतने तथा आडिट के दौरान आपत्ति होने पर धारा 89 के तहत तथा कार्यकाल खत्म होने बाद चार्ज नहीं सौंपने के कारण धारा 92 के तहत मामले एसडीएम कोर्ट में पेश किए गए हैं।
सरपंचों पर बकाया
जनपद पंचायत मामले बकाया राशि लाख में
कोयलीबेड़ा 45 25.80
अंतागढ़ 37 05.43
चारामा 15 02.89
नरहरपुर 13 07.39
भानुप्रतापपुर 9 02.75
दुर्गूकोंदल 4 04.06
कांकेर 2 02.86
कुल 125 51.20
((आंकड़े जिपं से मिली जानकारी के अनुसार))
कई सरपंचों से वसूलना है 50 लाख से अधिक
ञ्चकुछ सरपंच जेल भेजे गए तो कुछ की संपत्ति भी की गई कुर्क और कई पर कार्रवाई
ञ्चपंचायतों के सरकारी पैसों में हेराफेरी करने के जिले में 125 मामले कोर्ट में चल रहे
सेवा के बहाने