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शहर सीमा का विस्तार नहीं, अटके विकास कार्य
भास्कर न्यूज - कांकेर
जिला बने कांकेर को 15 साल हो चुके हैं, लेकिन शहर सीमा का विस्तार फिर भी अब तक नहीं हो पाया है। शहर सीमा कम होने से यहां सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। शहर का विस्तार करने कुछ ग्राम पंचायतों को जोडऩे की मांग लगातार उठती रही है, लेकिन इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
1998 में कांकेर जिला बना लेकिन शहरी सीमा का विस्तार नहीं हो पाया। वर्तमान में शहर सीमा का क्षेत्रफल 9.67 किमी है। शहर में 18 वार्ड हैं। आबादी 27532 तथा मतदाताओं की संख्या 19120 है। लंबे समय से शहर से सटे कुछ ग्राम पंचायतों को नगर पालिका में जोडऩे की मांग चल रही है। शासन के आदेश पर नगर पालिका परिषद ने साल भर पूर्व ग्राम पंचायत सिंगारभाठ, कोदाभाठ, पंडरी पानी, मनकेशरी, गोविंदपुर, ठेलका बोड़ को नगर पालिका में जोडऩे का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर शासन को भेजा लेकिन इसके बाद भी इस दिशा में अब तक कुछ नहीं हो पाया है। नगर पालिका से जुडऩे के बाद मूलभूत सुविधाएं लोगों को मिलने लगेंगी साथ ही टैक्स भी बढ़ जाएगा।
हालांकि कुछ पंचायत प्रतिनिधि नगर पालिका से शामिल करने का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि इसके बाद वहां मनरेगा का काम भी बंद हो जाएगा। शहर से सटे गांवों में में समस्याएं गंभीर हो चुकी है। सड़कें है ही नहीं, नालियां बन नहीं पाई है। गलियों में स्ट्रीट लाइट नहीं होने से रात में अंधेरा छाया रहता है। पानी की समस्या भी है। इन सबसे छुटकारा पाने यहां के लोग नगर पालिका से जुडऩा चाहते हैं।
श्रीरामनगर वार्ड के पार्षद कृष्ण कुमार अत्री ने कहा कि यदि कुछ ग्राम पंचायतें नगर पालिका से जुड़ जाती हैं तो इससे भविष्य में कांकेर नगर निगम भी बन सकता है। लोगों का मानना है कि शहरी सीमा का विस्तार होने से कांकेर का भी तेजी से विकास होगा। बरदेभाठा पार्षद विवेक पर्ते व जनकपुर पार्षद नारायण चंदेल का कहना है कि शहरी सीमा में अभी शासकीय जमीन का अभाव होने से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं इसलिए शहर का विस्तार जल्द से जल्द होना जरूरी है।
कांकेर. शहर सीमा का नक्शा।
विस्तार से होगी सुविधा
॥पंचायतों के जुडऩे से शहर का विस्तार होगा। बहुत से विकास कार्य जगह के अभाव में नहीं हो पा रहे हैं। ग्राम पंचायतों को नगर पालिका से जोडऩे एनओसी लेने प्रयास किया जाएगा।ञ्जञ्ज
पवन कौशिक, अध्यक्ष, नगरपालिका परिषद कांकेर
कांकेर को जिला बने 15 साल हो चुके हैं, लेकिन इसमें कुछ पंचायतों को जोडऩे की मांग पूरी नहीं होने से लोग सुविधाओं से वंचित