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रायमुड़ा में 1968 से काबिज जमीन का वनाधिकार मान्यता मांग रहे आदिवासी

7 वर्ष पहले
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महासमुंद वन परिक्षेत्र के ग्राम रायमुड़़ा, गुडरूडीह, नवागांव, सिनोधा, बिरबिरा, मालीडीह, बंदोरा और झिलमिला के आदिवासी परिवारों ने वनाधिकार मान्यता की मांग पर सत्याग्रह शुरू किया है। 28 जनवरी से पदयात्रा निकालकर कलेक्टोरेट पहुंचे हजारों आदिवासी 1968 से काबिज वनभूमि का पट्टा देने के बजाए उन्हें खदेडऩे के सरकारी फरमान का विरोध कर रहे थे। रायमुड़ा और बाकी गांवों के आदिवासियों के इस आंदोलन का नेतृत्व एकता परिषद के हलधर मिश्रा कर रहे थे। इस आंदोलन का समर्थन फोरम फार फास्ट जस्टिस के अध्यक्ष डा अजित डेग्वेकर, सचिव राकेश चौबे, इंदरजीत छाबड़ा, ममता शर्मा और संजय सोलंकी ने भी किया है। कलेक्टोरेट पहुंचने के पहले आदिवासियों की लंबी रैली निकली। सभा हुई और अपर कलेक्टर ओंकार यदु मिलकर मांग का ज्ञापन सौंपकर जल्द निराकरण करने के लिए कहा।



करवाई जाएगी जांच

भूमि अधिकार मांगने कलेक्टोरेट पहुंचे आदिवासी



अपर कलेक्टर ओंकार यदु ने एकता परिषद और फोरम फार फास्ट जस्टिस के लेटर हेड पर तैयार ज्ञापन पर आश्वासन दिया कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराकर अग्रिम कार्रवाई के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। उन्होंने आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल से कहा कि किसी भी आदिवासी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। जो न्यायसंगत होगा उसे शासन और प्रशासन पूरा करेगा।