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राजिम का चयन इसलिए

7 वर्ष पहले
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लोगों में यह जिज्ञासा बनी हुई है कि अक्कलकोट महाराष्ट्र गोवा के लोगों ने राजिम का सोमयज्ञ करने चयन क्यों किया है। श्री जाजू ने बताया कि परम सदगुरू गजानंद महाराज के परदादा पुरुषोत्तम महाराज राजिम में रहते थे। यह करीब सन् 1850 की बात है। इसके बाद वे महाराष्ट्र के अक्कलकोट चले गए थे। इस वजह से छत्तीसगढ़ के राजीवलोचन भगवान की नगरी राजिम में सोमयज्ञ कराने का निर्णय संस्था ने लिया है।
उन्होंने बताया कि इसके लिए स्थानीय नागरिकों का स्वस्फूर्त सहयोग मिल रहा है।