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राजिम में सुख-समृद्धि के लिए महासोमयज्ञ शुरू
राजिम - मेला स्थल पर 6 दिवसीय महा सोमयज्ञ गुरुवार को पूरे विधि-विधान के साथ प्रारंभ हुआ। गणेश एवं गजानंद महाराज की चरण पादुका को पूजा-अर्चना कर यज्ञ स्थल पर स्थापित किया गया। पीपल एवं कदम की लकड़ी का घर्षण कर यज्ञ के लिे अग्नि उत्पन्न की गई। यज्ञ 4 फरवरी तक चलेगा। पुराणों के अनुसार इंद्र देवता ने सोमयज्ञ कराया था।
100 यज्ञ कराने पर उन्हें इंद्र की कुर्सी मिली।
उसके बाद किसी ने भी सोमयज्ञ कराने की हिम्मत अब तक नहीं की है, या जिन्होंने भी कराया है वह सफल नहीं हो पाया है। यज्ञ के प्रथम दिन उद्घाटन, मंडप प्रवेश, गणेश पूजन, गजानन महाराज का पादुका पूजन व स्थापना व वेदीपूजन के साथ पहला प्रवग्र्य किया गया। शुक्रवार को प्रवग्र्य व वेदपठन होगा। महासोम यज्ञ का आयोजन वेद विज्ञान अनुसंधान संस्थान अक्कलकोट महाराष्ट्र द्वारा किया जा रहा है। संस्था के प्रमुख डा. पुरुषोत्तम राजिम वाले हैं। वे शुक्रवार को राजिम पहुंचेंगे।
बताया जाता है कि इस पूरे आयोजन में 20 लाख रुपए से ज्यादा का खर्च आएगा। हवन के लिए 10 टन लकड़ी व 150 किलो गाय का शुद्ध घी लगेगा। मुख्य यज्ञकर्ता श्रीनिवास सत्री हैं। उन्होंने आज अन्य अनुयायियों के साथ यज्ञ कार्य प्रारंभ किया। हवन के लिए चार अलग-अलग स्थानों पर पंडाल में ही हवन कुंड बनाए गए हैं। हवन कुंड की गहराई 7 फीट है। इससे 40 फीट ऊंची ज्वाला ऊपर उठेगी। हवन कुंड को बांस से चारों ओर घेरा गया है।