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राइस मिलें बंद मजदूर बेकार, भट्ठे प्रभावित

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज . बलौदाबाजार
राइस मिलर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल की वजह से पिछले 12 दिनों से जिले की 65 राइस मिलें बंद पड़ी हैं। मिलों में कार्य करने वाले मजदूर बेकार बैठे हैं। हड़ताल का असर तेल मिल, ईंट भट्ठे, ट्रांसपोर्ट तथा पावर प्लांट पर भी नजर आ रहा है।
विदित हो कि प्रशासन द्वारा गत वर्ष के धान की मिलिंग के लिए राइस मिलर्स पर दबाव बनाए जाने के विरोध में एक अप्रैल से प्रदेश के राइस मिलर्स ने हड़ताल कर दी है। अनिश्चितकालीन हड़ताल से जिले की 65 राइस मिल बंद हैं। राइस मिलर्स तथा प्रशासन के बीच की खींचतान में इन मिल में कार्यरत मजदूरों को सर्वाधिक परेशान होना पड़ रहा है तथा मिल मालिकों ने मजदूरों को बैठा दिया है। जानकारी के अनुसार एक मिल में लगभग
25 स्थायी कर्मचारी होते हैं इस लिहाज से जिले की 65 राइस मिलों में लगभग 1,625 मजदूर परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
भट्ठे बंद होने के कगार पर
राइस मिलों के बंद होने का असर ईंट भट्टों पर भी नजर आ रहा है। ग्रीष्मकाल में ईंट भट्टों का व्यवसाय जोरों पर होता है तथा भट्टों में ईंधन के रूप में राइस मिल के भूसे का ही उपयोग किया जाता है। राइस मिलों के बंद होने से ब्लाक के दो दर्जन से अधिक ईंट भट्ठे बंद होने के कगार पर पहुंच चुके हैं। ईंट भट्टों के साथ ही साथ हड़ताल की वजह से राइस ब्रांड का तेल बनाने वाले तेल मिल, धान का परिवहन करने वाले ट्रक तथा पावर प्लांट पर भी हड़ताल से प्रभावित हुए हैं। हड़ताल के चालू रहने से आगामी दिनों में कई ईंट भट्ठे तथा पावर प्लांट के प्रारंभ रहने पर भी संकट मंडरा सकता है।




शासन को चिंता नहीं है

स्थानीय विधायक जनकराम वर्मा ने राइस मिलर्स की हड़ताल पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मिलरों की हड़ताल से प्रदेश के लाखों मजदूर, ट्रांसपोर्टर, परिवहन मालिक सहित सैकड़ों छोटे व्यापारी व व्यवसायी प्रभावित हो रहे हैं। इसकी चिंता राज्य शासन को नहीं है। मिलर्स की हड़ताल की वजह से छोटे किसान अपना धान औने-पौने दामों में बिचौलियों को बेचने के लिए मजबूर हैं। इस मामले में राज्य शासन द्वारा उचित पहल करते हुए किसी निश्चित ठोस नतीजे पर प्रयास करना चाहिए, जिससे आम लोगों को राहत मिल सके।