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वेदांता को सीधे शेयर नहीं

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - कोरबा

केन्द्र सरकार बालको के अपने ४९ प्रतिशत शेयर खुले बाजार में निलामी से बेचेगी। वेदांता ने हाल ही में बालको व हिन्दुस्तान जिंक में केन्द्र सरकार की हिस्सेदारी खरीदने के लिए दो साल पहले दिए अपने १७ हजार करोड़ के आफर को बढ़ाकर २४ हजार ६६० करोड़ का करने के लिए शेयर होल्डरों की सहमति ली थी।

दो दिन पहले केन्द्र सरकार की केबिनेट कमेटी ऑन इकोनामिक अफेयर्स ((सीसीईए)) की बैठक में बालको व हिन्दुस्तान जिंक में सरकार की हिस्सेदारी को बेचने का निर्णय ले लिया। 1० दिन पहले ही एटोर्नी जनरल जीई वाहनवती की राय पर कानून मंत्रालय ने भी शेयर को निलामी से बेचने की सहमति दे दी थी। इधर सेसा स्टरलाइट के एक अधिकारी का कहना है कि हाल ही में कंपनी ने बालको की ४९ प्रतिशत व हिन्दुस्तान जिंक की २९.५ प्रतिशत केन्द्र की हिस्सेदारी खरीदने के लिए अपने शेयर धारकों की सहमति ली है। फरवरी २०१२ में केन्द्र सरकार को इसके लिए 17 हजार २७५ करोड़ की आफर दी गई थी। जिसे बढ़ाकर २४ हजार ६६० करोड़ में शेयर खरीदने की सहमति शेयर धारकों ने दी है। चूंकि अब केन्द्र सरकार ने वेदांता को सीधे शेयर उसके आफर से बेचने की बजाए निलामी का निर्णय लिया है सो इस पर तात्कालिक तौर पर हम कुछ नहीं कर सकते। समूह का उच्च प्रबंधन इस पर निर्णय लेगा। वैसे चूंकि दोनों ही कंपनी का संचालन अधिकार वेदांता के पास है सो स्वाभाविक तौर पर दूसरी कंपनी की रूचि इसमें कम ही होगी ऐसा हम मानते हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि केन्द्र के शेयर बेचने के निर्णय के बाद हिन्दुस्तान जिंक के शेयर में उछाल आया है। बालको लिस्टेड कंपनी नहीं है। सरकार इसके शेयर के बदले में ४००० करोड़ की अपेक्षा रखती है।



हिन्दुस्तान जिंक विनिवेश की हो रही है सीबीआई जांच

२००१ में हुआ था

बालको का विनिवेश

मार्च २००१ में बालको के ५१ प्रतिशत शेयर ५५१.५ करोड़ में स्टरलाइट इंडस्ट्रीज को मिले थे। इसके साथ ही उसके संचालन का अधिकार भी स्टरलाइट इंडस्ट्रीज को मिल गया था। २००३ में हिन्दुस्तान जिंक के भी ६५ प्रतिशत शेयर स्टरलाइट को मिले। ५.५ प्रतिशत शेयर विनिवेश करार के तहत हिन्दुस्तान जिंक के कर्मचारियों को मिले। वहीं उसके २९.५ प्रतिशत शेयर अभी भी केन्द्र सरकार के पास हैं। करार के मुताबिक बालको के ५ प्रतिशत शेयर भी बालको कर्मियों को मिलने थे। जो आज तक नहीं मिले हैं।

४९ प्रतिशत शेयर वेदांता को

देने का रहा है विरोध

स्टरलाइट इंडस्ट्रीज अनिल अग्रवाल की वेदांता समूह की कंपनी है। पिछले वर्ष ही इसी समूह की सेसा गोवा का विलय स्टरलाइट में करके एक नई कंपनी सेसा-स्टरलाइट बनाई गई। जिसके अधीन अब बालको है। बालको का विनिवेश २००१ में एनडीए शासनकाल के दौरान हुआ था। उस समय इस सौदे में गड़बड़ी के आरोप विपक्षी कांग्रेस सहित अन्य दलों ने लगाए थे। श्रमिक संगठन निरंतर बालको के केन्द्र सरकार के पास बचे ४९ प्रतिशत शेयर वेदांता को देने का विरोध करते रहे हैं।

शेयर बेचने का निर्णय राष्ट्र के साथ धोखा : मिश्रा

विनिवेश से पहले व अब बालको

बालको कर्मचारी संघ ((बीएमएस)) के महासचिव राजेन्द्र मिश्रा ने कहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा बालको के ४९ प्रतिशत शेयर बेचने का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण व राष्ट्र से धोखा है। चाहे फिर इसे ओपन मार्र्केट आक्शन से ही क्यों न बेचा जाए। हिन्दुस्तान जिंक सौदे की सीबीआई जांच कर रही है। जिसमें लाखों करोड़ के घोटाले के तथ्य सामने आ रहे हैं। बालको विनिवेश की यदि जांच की जाए तो इसका मामला हिन्दुस्तान जिंक से एक कदम आगे ही निकलेगा।

बालको कर्मियों को

पहले मिले शेयर : सिंह

बालको इंटक के महासचिव जयपाल सिंह का कहना है कि सभी प्रमुख पांच श्रमिक संगठनों की बैठक लेकर हम आगे की रणनीति तैयार करेंगे। बालको के शेयर बेचने का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है। आज तक विनिवेश करार के अनुसार बालको कर्मचारियों को पांच प्रतिशत शेयर नहीं मिले हैं। इस पर निर्णय होना चाहिए।

एकजुट होकर करेंगे विरोध : बनर्जी

सीटू के महासचिव एनएन बनर्जी ने कहा है कि केन्द्र सरकार की हिस्सेदारी बेचने का सभी श्रमिक संगठन एकजुट होकर विरोध करेंगे। बालको विनिवेश सौदे की आज तक सही ढंग से जांच नहीं हुई। न ही इसके शेयर बेचने के लिए ट्रेड यूनियन को विश्वास में लिया गया है। ट्रेड यूनियन तो बालको के ५१ प्रतिशत शेयर भी वेदांता से वापस लेने की मांग करते रहे हैं।

२००१ में विनिवेश से पहले बालको केन्द्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम था। तब इसकी सालाना उत्पादन क्षमता 1 लाख टन एल्यूमिनियम की थी। कोरबा स्थित इसके प्लांट में बाक्साइट से २ लाख टन एल्यूमिना बनता था। जो बाद में एल्यूमिनियम धातु में परिवर्तित किया जाता था। बालको का २७० मेगावाट का बीसीपीपी पावर प्लांट था। विनिवेश करार के अनुसार प्रथम चरण में लगभग ५ हजार करोड़ के निवेश से बालको ने २.४५ लाख टन एल्यूमिनियम बनाने वाला स्मेल्टर, ५४० मेगावाट का पावर प्लांट बनाया। वहीं पुराना 1 लाख टन का स्मेल्टर व २ लाख टन उत्पादन क्षमता की रिफाइनरी बंद कर दी गई। विस्तार के दूसरे चरण में लगभग ९ हजार करोड़ का निवेश किया गया है। जिससे 12०० मेगावाट का पावर प्लांट व ३.२५ लाख टन का स्मेल्टर बनकर तैयार है। किन्तु इसके संचालन की अनुमति राज्य शासन से नहीं मिली है। अनुमति न मिलने का कारण निर्माण व संचालन के लिए विभिन्न निर्धारित मापदंडों का पालन न किया जाना व नियमों का उल्लंघन बताया जा रहा है। विनिवेश से पहले बालको में ७००० कर्मचारी-अधिकारी थे। जिनकी संख्या अब घटकर आधी रह गई है। वहीं लगभग ६००० ठेका श्रमिक यहां कार्यरत विभिन्न ठेका कंपनियों में हैं।

पिछले महिने सीबीआई ने हिन्दुस्तान जिंक विनिवेश के मामले में पीई ((प्रारंभिक जांच)) दर्ज की है। आरोप है कि इस सौदे में कंपनी की वास्तविक संपत्ति का गलत मूल्यांकन किया गया। जिसके कारण 1 लाख करोड़ की क्षति आंकलित की गई है।

विनिवेश लक्ष्य पूरा करने में मिलेगी केन्द्र को मदद

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने वित्तीय वर्ष २०१३-१४ में ५५ हजार करोड़ की राशि विनिवेश से जुटाने का लक्ष्य रखा था। कोल इंडिया का १० प्रतिशत विनिवेश ट्रेड यूनियनों के विरोध के कारण घटाकर ५ प्रतिशत करना पड़ा। हिन्दुस्तान जिंक व बालको के शेयर बेचने से केन्द्र को अपना विनिवेश लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।







निर्णय - केन्द्र सरकार बालको व हिन्दुस्तान जिंक में बेचेगी अपनी हिस्सेदारी ओपन मार्केट आक्शन से