बालको को चेक लौटा दिया एएलसी ने
भास्कर न्यूज - कोरबा
बालको संयंत्र परिसर के 2७५ ठेका कर्मी गुरुवार को भी हड़ताल पर रहे। वेज एग्रीमेंट के एरियर्स भुगतान को लेकर उनका पिछले डेढ़ माह से प्रबंधन के साथ खींच-तान जारी है। बुधवार को उन्होंने प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाकर पॉट रूम व कार्बन एरिया का काम ठप कर दिया था। प्रबंधन ने भी भुगतान देने की बजाए 36.४६ लाख रुपए का चेक सहायक श्रमायुक्त कार्यालय को भेज दिया। प्रबंधन के इस रूख पर नाराजगी जाहिर करते हुए चेक लौटाते समय सहायक श्रमायुक्त कार्यालय ने सख्त हिदायत दी है कि वे चेक अथवा एकाउंट के माध्यम से ठेका कर्मियों को शीघ्र भुगतान दे।
यह पहला मामला है जब किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान ने अपने संस्थान में कार्य करने वाले ठेका कर्मियों को भुगतान करने का जिम्मा सहायक श्रमायुक्त पर थोप दिया। सहायक श्रमायुक्त सत्यप्रकाश पिछले चार दिन से प्रवास पर है। ऐसे में विभाग के निरीक्षक एके अमलीवार ने बालको प्रबंधन को भुगतान संबंधी आदेश जारी किया। वहीं ठेका कर्मी इस बात पर अड़े है कि जब तक उन्हें भुगतान नहीं मिल जाता वे काम पर कतई नहीं लौटेंगे। यह मामला नवंबर 2013 से तूल पकड़ा था। जब पॉट रूम व कार्बन एरिया की ठेका कंपनी रामसन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने पहले तो वेज एग्रीमेंट में दोनों विभाग के ठेका कर्मियों को एक समान वेतन वृद्धि देने से इनकार कर दिया था। पहले 13 व 11 प्रतिशत की वेतन वृद्धि ठेका कर्मियों को दिया जा रहा था। तीन दिन तक चले हड़ताल के बाद प्रबंधन के हस्तक्षेप से चर्चा हुई और फिर 12-12 प्रतिशत वेतन वृद्धि देने पर समझौता हुआ था। लेकिन अप्रैल से अक्टूबर तक के वेज एग्रीमेंट का एरियर्स भुगतान अब तक नहीं किया गया। इसी वजह से मंगलवार को दो घंटे तक काम ठप रहा। प्रबंधन ने बुधवार को भुगतान लेने का वादा किया। लेकिन भुगतान नहीं मिलने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर ठेका कर्मी चले गए।
इंटक महासचिव जयपाल सिंह से प्रबंधन के अफसरों ने चर्चा की। बात कैश भुगतान नहीं होने को लेकर बिगड़ गई। प्रबंधन ने सहायक श्रमायुक्त द्वारा कैश भुगतान नहीं करने संबंधी आदेश जारी करने की बात कहते हुए चार दिन की मोहलत मांगी। जिसे ठेका कर्मियों ने इनकार कर दिया। इसके कारण ही प्रबंधन ने एरियर्स राशि का चेक सहायक श्रमायुक्त कार्यालय को भेजकर कर्मियों को भुगतान करने के लिए पत्र प्रस्तुत किया। जिसे वापस लौटा दिया गया है। शेष पेज 14
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सुबह से एएलसी दफ्तर में डटे रहे मजदूर
बालको प्रबंधन ने कम्प्रेसिव बिल्डिंग के सामने प्रदर्शन कर रहे ठेका कर्मियों को भुगतान करने से मना करते हुए कहा कि उन्होंने चेक सहायक श्रमायुक्त कार्यालय को भेज दिया है। अब भुगतान उनके कार्यालय से ही किया जाएगा। प्रबंधन से नाराजगी जाहिर करते हुए ठेका कर्मी इंटक नेताओं के साथ एएलसी दफ्तर पहुंचे। जहां उन्हें बताया गया कि एएलसी सत्यप्रकाश पिछले तीन दिन से निजी प्रवास पर है। काफी प्रयास के बाद यहां के निरीक्षक अमलीवार से उनकी चर्चा हुई। इसके बाद चेक वापस करने और भुगतान संबंधी आदेश प्रबंधन को जारी करने की कार्रवाई की गई।
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प्रबंधन पर आपराधिक मामला दर्ज हो : जयपाल
बालको प्रबंधन पर आपराधिक षडय़ंत्र करने का आरोप इंटक महामंत्री जयपाल सिंह ने लगाया है। उन्होंने कहा कि जब 6 माह पहले आर्थिक अनियमितता को लेकर रामसन इंडिया को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया है और उसके संचालक के संयंत्र परिसर में प्रवेश पर रोक लगाया गया है तो ठेका कंपनी के नाम पर प्रबंधन मजदूरों को वेतन व अन्य स्वत्वों का भुगतान क्यों कर रही है? यह भुगतान किसी अन्य ठेका कंपनी को नियोजित कर अथवा प्रबंधन के एकाउंट से किया जाना चाहिए।
नाइट शिफ्ट से ड्यूटी
पर लौटे मजदूर
बालको प्रबंधन ने शुक्रवार की शाम 5 बजे तक हर हाल में भुगतान करने का आश्वासन दिया है। साथ ही कर्मचारियों से इस बात का भी वादा किया कि दो दिन के हड़ताल के भुगतान की कटौती भी नहीं की जाएगी। इस पर मजदूरों ने नाइट शिफ्ट से ड्यूटी पर लौटने का ऐलान कर दिया है।
बालको प्रबंधन उलझन में
भुगतान को लेकर बालको प्रबंधन उलझ गया है। इसी वजह से उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आखिर भुगतान के लिए राशि किसके एकाउंट में जमा कराई जाए? पहले ठेका कंपनी रामसन के एकाउंट में वेतन की राशि प्रबंधन ने जमा कराई थी तब बैंक प्रबंधन ने पुराने लोन के एवज में इस राशि को समायोजित कर लिया था। इसी वजह से ठेका कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया। अब प्रबंधन को इस बात का डर है कि कहीं एरियर्स की राशि ठेका कंपनी के एकाउंट में डाली गई तो कहीं यह भी डूब न जाए? प्रबंधन अपने एकाउंट से ठेका कर्मियों को भुगतान देकर बड़ी गलती नहीं करना चाहती। इसी वजह से उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि आखिर भुगतान किस तरह किया जाए?
पॉट रूम व कार्बन एरिया में दूसरे दिन भी ठेका कर्मी रहे हड़ताल पर
एएलसी कार्यालय के सामने प्रदर्शन करते ठेका श्रमिक।