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महासंघ ने मांगा पुनरीक्षण वेतन

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - कोरबा

देश के महारत्न कंपनियों के अधिकारी संघ के महासंघ ने एकजुटता दिखाते हुए वेतन अधिकारियों के वेतन में विसंगति दूर करने की मांग की है। कोल माइंस ऑफीसर एशोसिएशन ने भी इसका समर्थन करते हुए १ जनवरी २०१२ से अधिकारियों के वेतन पुनरीक्षण की मांग की है।

कोल मांइस ऑफीसर एशोसिएशन एसईसीएल कोरबा क्षेत्र के सचिव पीके सिंह राठौर ने बताया कि अधिकारियों के वेतन मे विसंगति दूर करने करने की मांग लंबे समय से हो रही है। इसे लेकर अब महारत्न कंपनियों के अधिकारियों का संघ भी एकजुट होने लगा है। कोल इंडिया सहित एनटीपीसी, ओएनजीसी, गेल सहित दूसरे महारत्न कंपनियों के अधिकारी संघ के महासंघ की ओर से डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक इंटरप्राईजेस के सेक्रेटरी को पत्र लिखकर वेतन विसंगति दूर करते हुए १ जनवरी २०१२ से वेतनमान पुनरीक्षण की मांग की गई है।

पीके सिंह राठौर ने बताया कि कोल मांइस ऑफीसर एशोसिएश लंबे समय से वेतन विसंगति को दूर करने की मांग करता चला आ रहा है। उन्होने कहा कि कोल इंडिया में अधिकारियों के वेतनमान लागू होने के बाद से कर्मचारियों के वेतनमान में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। वर्तमान में कोल इंडिया के कर्मचारियों का वेतन जूनियर अधिकारियों के वेतन से ज्यादा है। कई अधिकारियों का वेतन कर्मचारियों के बराबर है। इस विसंगति के कारण अधिकारी वर्ग स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहा है। उन्होने कहा कि कोल इंडिया सहित अन्य के न्द्रीय उपक्रमों मेें वर्तमान वेतनमान १ जनवरी २००७ से लागू है। जिनका महंगाई भत्ता ९० प्रतिशत के लगभग पहुंच गया है। कन्फेडरेशन ऑफ महारत्न कंपनी ऑफीसरर्स की ओर से मांग की गई है कि पिछले वेतनमान की तरह महंगाई भत्ता ५० प्रतिशत से ज्यादा होने की दशा में मूल वेतन में ५० प्रतिशत जोड़ दिया जाना चाहिए। वर्तमान में लागू वेतनमान १ जनवरी १९९७ से ३१ दिसबंर २००६ तक लागू था। जिसमें ५० प्रतिशत महंगाई भत्ता जोड़े जाने का प्रावधान था। लेकिन वर्तमान में इस तरह की व्यवस्था नही होने से अधिकारी वर्ग में निराशा है। अधिकारियों के वेतनमान में भारी विसंगति के कारण इस तरह की स्थिति है। इसलिए एक जनवरी २०१२ से अधिकारियों के वेतनमान का पुनरीक्षण होना चाहिए।



डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक इंटरप्राइजेस के सेक्रेटरी को लिखा पत्र