उपकृत करने के लिए ब्लाक तक बदल दिया
कर्मचारी पद पदस्थ संस्था ब्लाक संलग्न ब्लाक संलग्नीकरण
मोनिका राय शिक्षक पंचायत मदनपुर ((रजकम्मा)) पाली पताढ़ी कोरबा १३ जुलाई 2012
राजेन्द्र अजय शिक्षक पंचायत टेड़ीकुड़ा पाली कलेक्टोरेट कोरबा ५ अक्टूबर २०१०
शशि कंवर शिक्षक पंचायत तिवरता पाली छुरीकला कटघोरा १४ जून 2013
निलिमा दीन शिक्षक पंचायत कपोट पाली छुरीकला कटघोरा १ जुलाई 2013
सोमा सोनवानी शिक्षक पंचायत परला पोड़ी उपरोड़ा डिंडोलभाठा कटघोरा ३ नवंबर २०१०
माया क्षत्रिय व्याख्याता पंचायत पोड़ी उपरोड़ा पोड़ी उपरोड़ा सलोरा क कटघोरा १८ अक्टूबर 2012
वीणा प्रधान व्याख्याता पंचायत लमना पोड़ी उपरोड़ा पुरैनाखार कटघोरा २० नवंबर 20१०
हरनारायण खरे शिक्षक पंचायत मातिन पोड़ी उपरोड़ा कटसीरा कटघोरा १ सितंबर २०११
मंजू टुडू व्याख्याता पंचायत बोइदा पाली देवरी कटघोरा २ अगस्त 2013
गरिमा मिश्रा व्याख्याता पंचायत मड़ई पोड़ी उपरोड़ा देवरी कटघोरा १ सितंबर 2011
रश्मि सुरेन्द्र शिक्षक पंचायत पखनापारा पाली जूनाडीह कटघोरा ८ अगस्त 2012
दिव्या श्री शिक्षक पंचायत खोडरी पोड़ी उपरोड़ा सलोरा क कटघोरा २३ अक्टूबर 2012
वर्षारानी सोनी व्याख्याता पंचायत नूनेरा पाली बिरदा कटघोरा १६ अगस्त 2011
एसडीएम कार्यालय में भी शिक्षक संलग्न
पाली ब्लाक में ७४ संलग्नीकरण
कोरबा ब्लाक में भी
पड़ गई जरूरत
कोरबा ब्लाक में आवश्यकता के नाम पर भी शिक्षकों को संलग्न किया गया है। इनमें संध्या यादव को कछार से रूमगरा, कमला राठौर को तिलकेजा से कोरबा, प्रबल सिंह चंदेल को खोड्डल से कोहडिय़ा, किरण टोप्पो को केराकछार से रूमगरा, निलेश्वर प्रसाद सतरंज को बेला से रूमगरा में संलग्न किया गया है। हालांकि यहां ज्यादातर संलग्नीकरण एकल व शिक्षक विहिन स्कूलों में किया गया है।
पाली ब्लाक में संलग्नीकरण लंबे समय से चला आ रहा है। इस ब्लाक में ७४ यूडीटी, प्रधान पाठक, शिक्षाकर्मी वर्ग-2 व 3 व भृत्य शामिल हैं। इनमें से 29 के ही आदेश में अधीक्षिकीय कार्य के लिए संलग्न करने का उल्लेख है। इसके अलावा जुलाई 2013 में जनसमस्या निवारण को लेकर कलेक्टर ने तीन शिक्षाकर्मियों को संलग्न करने का आदेश जारी किया है। २००९ से इस ब्लाक में संलग्नीकरण का खेल शुरू हुआ है। इस ब्लाक में बीईओ के अलावा सहायक आयुक्त, जिला पंचायत सीईओ डीपीसी, अनुविभागीय अधिकारी ने भी आदेश जारी किया है। ज्यादातर मुख्य मार्ग के पास के स्कूलों में दुरस्थ अंचल के शिक्षकों को संलग्न किया गया है। २००९, २०१० व २०११ में भी अटैच शिक्षकों का संलग्नीकरण समाप्त करना तो दूर आला अफसरों को जानकारी तक नहीं दी गई है। इस ब्लाक के कुछ शिक्षकों को अन्य ब्लाक के स्कूलों में अटैच कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि पाली ब्लाक में वर्ग तीन के लगभग १८० पद व दो के ३५ पद रिक्त हैं। २०१०-११ में शिक्षाकर्मी भर्ती हुई थी। १२६ पदों की चयन सूची को कलेक्टर ने रिक्त पद से अधिक बताकर निरस्त कर दिया था। यह मामला लंबे समय तक हाईकोर्ट में लंबित रहा। इसी वजह इस ब्लाक में एकल शिक्षकीय स्कूलों की संख्या अधिक है।
कटघोरा ब्लाक में शिक्षकों को अटैच करने के लिए सही बहाना भी अधिकारी नहीं ढूंढ पाते। इसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण पोड़ी उपरोड़ा बीईओ द्वारा तैयार की गई संलग्नीकरण की सूची में देखा जा सकता है। प्रायमरी स्कूल मड़ई में सहायक शिक्षक पंचायत के पद पर संजय कुमार की मूल पदस्थापना है। उन्हें एसडीएम कटघोरा कार्यालय में संलग्न किया गया है। इसका कारण शिक्षकों की कमी बताया गया है। हद तो यह है कि मूल पदस्थ संस्था का नाम मड़ई संकुल में होने का उल्लेख है। साथ ही एसडीएम कटघोरा कार्यालय को भी इसी संकुल का बताया गया है।
॥अटैचमेंट को लेकर जिला पंचायत सीईओ को जानकारी तैयार करने को कहा है। दफ्तरों में जो अटैच हैं उनका विकल्प नहीं होने पर विकल्प तैयार करने का निर्देश दिया है। अनुपयुक्त अटैचमेंट समाप्त कर दिया जाएगा।
रजत कुमार, कलेक्टर
गोविंद साहू - कोरबा
आदिवासी विकास विभाग के स्कूलों में संलग्नीकरण का खेल बिना किसी खौफ के चल रहा है। भले ही राज्य शासन या जिला प्रशासन संलग्नीकरण समाप्त करने के लिए दर्जनों आदेश जारी कर दिया। लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा है। हद तो यह है कि प्रशासन के आला अफसर भी न तो इस संबंध में रिपोर्ट मंगाते और न ही जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होती। कई शिक्षक बाबू का काम कर रहे हैं।
आदिवासी विकास विभाग में अटैचमेंट कोई नई बात नहीं है। दर्जनों ऐसे शिक्षक, व्याख्याता या शिक्षाकर्मी है जो चार-चार साल से मूल कार्यस्थल से अन्यत्र कार्य कर रहे हैं। इनमें से ऐसे भी शिक्षक हैं जिन्हें एकल शिक्षक अथवा शिक्षक विहिन संस्था होने के कारण संलग्न किया गया है, लेकिन ऐसे शिक्षकों के लिए जारी आदेश की आड़ पर बीईओ ने दर्जनों शिक्षकों को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए समानांतर आदेश जारी कर संलग्न कर दिया है। इनमें पाली ब्लाक सबसे आगे है। मुख्य मार्ग से दूरस्थ क्षेत्र में पदस्थ शिक्षकों को सड़क किनारे स्कूलों में अटैच कर दिया गया है, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। संलग्नीकरण का आदेश समय-समय पर अलग-अलग अफसरों ने जारी किया है। इनमें कलेक्टर व जिला पंचायत की सीईओ भी शामिल हैं। इसके अलावा सहायक आयुक्त, जिला शिक्षा अधिकारी, बीईओ, जनपद सीईओ, राजीव गांधी शिक्षा मिशन के डीपीसी के अलावा सीआरसी तक शामिल हैं। कुछ अफसरों के आदेश में संलग्नीकरण के कारणों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। लेकिन जिन शिक्षकों या शिक्षाकर्मियों को उपकृत किया गया है।
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शिक्षक कर रहे बाबू का काम
अनदेखी - आदिवासी विकास विभाग में संलग्नीकरण का खेल, पाली ब्लाक सबसे अधिक प्रभावित