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दावा-आपत्ति के बिना कैसे होगी भर्ती

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - कोरबा
नगर पालिक निगम में सहायक शिक्षक विज्ञान एवं कला की सीधी भर्ती के लिए जारी संशोधित चयन सूची विवादों में घिर गई है। इसके लिए दावा आपत्ति नहीं मंगाया गया है। इसके अलावा सूची में अनेक तरह की गंभीर त्रुटियां हैं। जिसे न्यायालय में चुनौती दी जाए तो पूरी भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगना तय है। यह अधिकारी-कर्मचारी के अलावा चयन समिति के सदस्यों की लापरवाही को दर्शाता है।
सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को इस बार आरक्षित वर्ग की सूची में शामिल कर दिया गया है। वे अभ्यर्थी जो दूर दराज के क्षेत्र में रहते हैं और वे नगर निगम कार्यालय आकर सूचना पटल का आवलोकन नहीं कर सकते। वेबसाइट में ही चयन सूची देखना चाहते हैं उन्हें इस त्रुटि के कारण बड़ा भ्रम हो सकता है। वे चयन से भी वंचित रह सकते हैं। दैनिक भास्कर ने अपने १ अक्टूबर के अंक में ‘शिक्षाकर्मी भर्ती में नियमों की हो रही अनदेखी’ शीर्षक से भर्ती में बरती गई त्रुटि को उजागर करते हुए समाचार का प्रकाशित की थी। लेकिन निगम प्रशासन शुरू में तो मानने को ही तैयार नहीं था, लेकिन जिला प्रशासन की सख्ती के बाद सूची का परीक्षण किया गया। चयन समिति के अध्यक्ष नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के क्षेत्रीय संयुक्त संचालक पीबी काशी को भर्ती नियम के तहत बनाया गया है। पदेन सचिव निगम के आयुक्त और एक मात्र सदस्य सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग हैं। वरिष्ठ व जानकार अधिकारियों ने पहली बार चयन सूची जारी करने में बड़ी गलतियां की। इस वजह से भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में चार माह की देरी हो गई। अंतत: नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से इस भर्ती के लिए मार्गदर्शन मांगा गया। मार्गदर्शन आने के बाद संशोधित सूची बनाई गई। इस सूची को चयन समिति के अध्यक्ष के सुपुर्द कर दिया गया। उन्हें निर्णय लेने में ही एक माह से ज्यादा का समय बीत गया। देर सवेर सूची जारी कर भी दी गई तो इसमें खामियां एक से बढ़कर एक है। अंतिम चयन सूची से पहले संभावित चयन सूची के अभ्यर्थियों से दावा आपत्ति मंगाना चाहिए। ऐसा पंचायत में अथवा अन्य विभागों में भर्ती के दौरान अभ्यर्थियों से दावा आपत्ति मंगाने का प्रावधान है। इसके बाद ही अंतिम चयन सूची का प्रकाशन किया जाता है। नगर निगम में तो पहली बार जो गड़बड़ी सामने आई है ऐसे में यहां तो विशेष तौर पर दावा आपत्ति मंगाया जाना चाहिए।