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मजदूरी भुगतान में विलंब

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - कोरबा

जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना का हाल बेहाल है। साल भर पहले जिन्होंने योजना के तहत काम किया था उन्हें आज तक भुगतान भी नहीं मिल पाया है। रोजगार सहायक तो यह भी बताने की स्थिति में नहीं है कि भुगतान कब तक उन्हें किया जाएगा। मजदूरों की माली हालत काफी खराब हो गई है। ब्लाक से लेकर जिला कार्यालय तक उन्होंने दर्जनों बार अपनी गुहार भी लगाई है।

प्रदेश सरकार को मनरेगा कनवरजेंस पुरस्कार से केन्द्र ने सम्मानित किया है। ग्रामीणों का जीवन स्तर सुधारने के लिए रोजगार गारंटी के तहत राज्य में बेहतर कार्य हुए हैड्ड। लेकिन जिले में हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। जिन मजदूरों ने नवंबर, दिसंबर 2012 में मनरेगा के तहत कार्य किया उन्हें आज तक भुगतान तक नहीं किया गया। इनमें कटघोरा ब्लाक के ग्राम रलिया, पाली ब्लाक के ग्राम कोरबी और कोरबा ब्लाक के ग्राम तितरडांड़ समेत दर्जनभर से ज्यादा गांव शामिल हैं। जहां के मजदूर भुगतान के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। ग्राम रलिया के 100 से ज्यादा ग्रामीणों ने मनरेगा में मजदूरी का काम किया था। उन्हें भूमि सुधार के तहत किसानों के खेतों में मिट्टी खुदाई के काम में लगाया गया था, ताकि खेत समतल हो सके और इसमें फसल लगाकर ज्यादा से ज्यादा उत्पादन किसान ले सके। जिन मजदूरों को इस कार्य में नियोजित किया गया था। उनमें बेल बाई 110 दिन, संतोषी 100 दिन, चौथी बाई 100 दिन, रणकुंवर 100 दिन, अवत्रि बाई 70 दिन, करम सिंह 100 दिन, गुहाराम यादव 100 दिन, गयामति द्वारा 100 दिन की मजदूरी करना शामिल हैं। इनके अलावा 90 से ज्यादा और मजदूर है। इन्हें प्रतिदिन 132 रुपए के हिसाब से भुगतान दिया जाना था। यानी प्रति मजदूर 13 हजार रुपए से ज्यादा भुगतान इस योजना के तहत साल भर पहले देना था। लेकिन अब तक उन्हें फूटी कौड़ी तक नहीं मिल पाया है। रोजगार सहायिका सविता कंवर राज्य शासन से राशि नहीं मिलने का तर्क उन्हें दे रही है। साथ ही आश्वासन देती है कि जल्दी ही उन्हें भुगतान दे दिया जाएगा। इसी तरह की स्थिति पाली ब्लाक के ग्राम पंचायत कोरबी की है। जहां के मजदूर पिछले 10-11 माह से भुगतान के लिए अफसरों के चक्कर पे चक्कर काट रहे हैं।

यहां के मजदूर दुखूराम, बिसाहिन, शिवशंकर पटेल, अन्न कुमार, प्रहलाद, अमीरलाल, प्यारेलाल, गणेशा बाई समेत दो दर्जन से अधिक मजदूरों ने बताया कि एक फरवरी 2013 से 10 मार्च 2013 तक 87 मजदूरों ने जोरहाडबरी मार्ग निर्माण का कार्य किया है। इसके लिए शासन ने 9 लाख 81 हजार रुपए का प्रस्ताव तैयार किया था। लेकिन आज तक मजदूरों को भुगतान तक नहीं मिल पाया है। इसी तरह पोड़ी उपरोड़ा ब्लाक के ग्राम छिंदिया में मजदूरों को फर्जी चेके से भुगतान किया गया है। इसकी शिकायत उप सरपंच बारेलाल ने की है।

पहाड़ी कोरवा भी ठगे गए

जिन्होंने काम नहीं किया उन्हें मिल गई मजदूरी

॥ मजदूरी भुगतान नहीं होने के मामले की तत्परता से जांच कराई जाएगी। राशि आबंटन के संबंध में भी जानकारी लेंगे और राशि उपलब्ध होने पर भुगतान कराने का आदेश जारी करेंगे। इस मामले में अगर कोई दोषी पाया गया तो उसे नहीं बख्शा जाएगा।

आर एक्का, सीईओ, जिला पंचायत

ग्राम कोरबी के ग्रामीणों के मुताबिक इस कार्य में जिन लोगों ने काम किया वे तो भुगतान के लिए भटक रहे हैं, लेकिन जिन्हें भुगतान दे दिया गया है, उन्होंने कभी यहां काम तक नहीं किया। ऐसे लोगों की संख्या लगभग 20 बताई गई है। मस्टर रोल में उनका नाम फर्जी तौर पर दर्ज कर लिया गया था। उन्हें भुगतान भी सरपंच व रोजगार सहायक ने मिलीभगत कर दे दिया। इस मामले की जांच की मांग की गई थी। लेकिन अब तक प्रशासन ने इस पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई।

पहाड़ी कोरवाओं को राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र माना जाता है। विशेष संरक्षित जनजाति में शामिल इस वर्ग के लिए केन्द्र व राज्य सरकार के द्वारा विशेष योजना भी बनाई जाती है। इसके बाद भी इन ग्रामीणों के जीवन में कोई सुधार नहीं आ पाया है। इससे उलट काफी मशक्कत के बाद कोरवा आदिवासियों ने मूलधारा में शामिल होने के लिए मनरेगा के कामों में मजदूरी किया। लेकिन वे भी पिछले साल भर से भुगतान के लिए भटक रहे हैं। यह मामला ग्राम पंचायत सिमकेंदा के तितरडांड़ गांव का है।





समस्या - रोजगार गारंटी योजना में एक साल बाद भी भुगतान नहीं, लगा रहे हैं चक्कर