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डीएसपीएम प्लांट की हालत सुधरी, विस्तार परियोजना फिर ठप
भास्कर न्यूज - कोरबा
राज्य पावर जनरेशन कंपनी के डीएसपीएम प्लांट की दूसरी इकाई से उत्पादन शुरू हो गया है। विस्तार परियोजना में पिछले दो सप्ताह से उत्पादन ठप हुआ था। सुधार के बाद 24 घंटे तक इस प्लांट से बिजली का उत्पादन हुआ। लेकिन तकनीकी खराबी के कारण संयंत्र से फिर बिजली का उत्पादन ठप हो गया।
डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत गृह की दूसरी इकाई से शुक्रवार की सुबह बिजली का उत्पादन ठप हो गया था। संयंत्र के सीई एमएस कंवर के मुताबिक बायलर ट्यूब में लिकेज के कारण संयंत्र से उत्पादन प्रभावित हुआ था। डीएसपीएम प्लांट में 250 मेगावाट की दो इकाईयां है। संयंत्र की कुल उत्पादन क्षमता 500 मेगावाट है। संयंत्र में खराबी आने के बाद एक इकाई से ही औसत 2३५ मेगावाट की लोड पर बिजली का उत्पादन हो रहा था। बुधवार को संयंत्र की दूसरी इकाई में सुधार के बाद उत्पादन शुरू हो गया है। संयंत्र से ४६५ मेगावाट की लोड पर बिजली बनने लगी है। इससे पावर कंपनी को थोड़ी राहत मिली है। दूसरी ओर एचटीपीपी विस्तार परियोजना की सेहत में ंसुधार होते नहीं दिख रहा है। 15 दिनों पूर्व संयंत्र में टेक्नीकल फाल्ट आने के कारण उत्पादन ठप हो गया था। प्रबंधन के मुताबिक भेल के अधिकारी प्लांट के सुधार में लगे है। सोमवार को ५०० मेगावाट के विस्तार संयंत्र को सुधार कर उत्पादन शुरू किया गया था। लेकिन 24 घंटे चलने के बाद प्लांट से उत्पादन फिर ठप हो गया। विस्तार परियोजना से नियमित बिजली का उत्पादन नहीं होने से पावर जनरेशन कंपनी को उत्पादन क्षति झेलनी पड़ रही है। वहीं प्रदेश में मांग की अपेक्षा बिजली की आपूर्ति के लिए भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
यूनिट के संचालन में लापरवाही बरतने पर जांच के आदेश
राज्य पावर जनरेशन कंपनी के कोरबा पूर्व प्लांट की ५० मेगावाट की दूसरी व १२० मेगावाट की पांचवी इकाई से बुधवार को उत्पादन ठप हो गया है। संयंत्र के १२० मेगावाट की पांचवी इकाई के संचालन मे अधिकारियों द्वारा लापरवाही बरतने की बात सामने आई है। इसके जांच के आदेश भी दे दिए गए है। कोरबा पूर्व प्लांट के मुख्य अभियंता एसके बंजारा ने बताया कि मामले में जांच के आदेश दे दिए गए है। यूनिट संचालन में लापरवाही बरती गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई जरूर होगी। सूत्रों के मुताबिक मामले में जिम्मेदार तीन अधिकारियों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है।
बिजली की मांग 3 हजार मेगावाट
प्रदेश में बिजली की मांग 3 हजार मेगावाट है। शाम को बिजली की मांग में एकाएक बढ़ोत्तरी हो रही है। इस स्थिति में सेंट्रल पुल से एक हजार मेगावाट बिजली ड्राल करनी पड़ रही है। बुधवार की देर शाम भी प्रदेश में बिजली की मांग 3 हजार मेगावाट से ज्यादा थी। जबकि उपलब्धता 2९०० मेगावाट रही।
बांगो हाइडल प्लांट बना सहारा
५०० मेगावाट के विस्तार परियोजना में तकनीकी खराबी के कारण बिजली नहीं बन रही। वहीं पावर कंपनी के संयंत्रों की तीन इकाई से भी बिजली का उत्पादन ठप है। जिसके कारण मांग की अपेक्षा बिजली की आपूर्ति में परेशानी हो रही है। बांगो हाईडल प्लांट पावर कंपनी के लिए सहारा बना हुआ है। बांगो प्लांट से बुधवार को ८० मेगावाट उत्पादन हो रहा था।
कम नहीं हो रही पावर कंपनी की मुश्किलें