- Hindi News
- पदोन्नति और पदावनति के बीच झूल रहा लैब टेक्नीशियन
पदोन्नति और पदावनति के बीच झूल रहा लैब टेक्नीशियन
ञ्च नियमित होने के बाद भी पदनाम बदलने के चलते उलझ कर रह गया लैब टेक्नीशियन।
ञ्च इंजीनियरिंग कॉलेज में पदस्थ इस कर्मचारी से अब रिकवरी की तैयारी शुरू की विभाग ने।
भास्कर न्यूज - जगदलपुर
इंजीनियरिंग कॉलेज में वर्ष 1988 में प्रयोग शाला सहायक के पद पर तदर्थ तौर पर पदस्थ होने और बाद में नियमित नियुक्ति पाने वाला संतोष कुमार नाग पिछले 25 सालों से प्रयोगशाला सहायक और प्रयोगशाला तकनीशियन पदनाम के बीच झूल कर रह गया है।
एक कर्मचारी को साल भर बाद प्रयोगशाला तकनीशियन बना दिया गया। हर छह महीने में तदर्थ नियुक्ति झेलने के बाद 16 फरवरी 1989 को प्रयोगशाला तकनीशियन के पद पर नियमित नियुक्ति दी गई। इसके एक साल बाद संशोधन आदेश जारी कर विभाग ने उसे फिर से प्रयोग शाला सहायक बना दिया और वर्ष 1988 से 1991 तक \\\'यादा वेतन लेने के एवज में रिकवरी के आदेश थमा दिए। इसके बाद से उसे प्रयोगशाला सहायक ही बनाए रखा गया और 27 सितंबर 2003 को 5वें वेतनमान के तहत वेतन का फिक्सेशन किया गया। इसके बाद विभाग ने इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रयोगशाला सहायकों का पद खत्म कर सभी को प्रयोगशाला तकनीशियन बना दिया।
इसके बाद 11 अगस्त 2005 को पत्र जारी कर प्रयोगशाला सहायक से उसे प्रयोगशाला तकनीशियन बना दिया गया। इस संशोधन के साथ ही उसे 950-1500 की जगह 1200-2040 का वेतनमान देने और 17 साल तक कम वेतन के एवज में एरियर्स का भुगतान भी कर दिया गया।
इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य ने 15 जनवरी को पत्र जारी कर कहा कि छठवें वेतनमान के लिए वेतन निर्धारण की जांच के लिए कोष लेखा एवं पेंशन के कार्यालय में भेजने पर वहां से आपत्ति लगा दी गई कि पद परिवर्तन किए गए कर्मचारियों के पास प्रयोगशाला तकनीशियन हेतु निर्धारित योग्यता नहीं होने से वेतनमान 1200-2040 की जगह प्रयोगशाला सहायक का वेतनमान 950-1530 देय होगा। इसी के आधार पर समयमान वेतनमान भी निर्धारित कर दिया गया। इसके दो दिन बाद ही फिर से एक पत्र जारी कर तकनीकी शिक्षा संचालक द्वारा अलग-अलग तारीखों में की गई आपत्ति का हवाला देते हुए अब तक किए गए सभी \\\'यादा भुगतान की वसूली के आदेश थमा दिए हैं।
इस आदेश के मिलते ही संतोष के हाथ पांव फूल गए, विभाग के इस आदेश के बाद अब उसे हर महीने 8 हजार रुपए का नुकसान तो उठाना पड़ेगा ही साथ ही लाखों रूपए की वसूली भी कर ली जाएगी। संतोष के अनुसार यह रिकवरी सात लाख रुपए तक हो सकती है।
हालांकि उसने तकनीकी शिक्षा संचालनालय से वर्ष 1993 में जारी उस आदेश का हवाला भी दिया जिसमें आरक्षित पद पर विशेष अभियान के तहत नियुक्त कर्मचारियों पर शैक्षणिक अर्हता का बंधन लागू नहीं होने की बात कही गई है। इसके बावजूद अब तक कोई हल नहीं निकल सका है। इनके साथ ही तीन और कर्मचारियों पर भी वसूली की तलवार लटकी हुई है।