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पुत्र को बनाया डाक्टर, मरने के बाद देहदान कर गई
बुजुर्ग महिला ने किया देह दान, मंगलवार को मृत्यु के बाद परिजनों ने सौंपा शव मेकाज प्रबंधन को। आंखों व शरीर का होगा उपयोग।
भास्कर न्यूज - जगदलपुर
जीते जी तो उसने लोगों की सेवा करने के लिए अपने पुत्र को पढ़ाया लिखाया और उसे डाक्टर बनाया पर जिंदगी के अंतिम पलों में भी उसने समाज की बेहतरी के लिए मिसाल कायम करते हुए अपना देह दान कर दिया। इसके अलावा उसने अपनी आंखें भी दान कर दी।
मंगलवार को पथरागुड़ा निवासी 62 वर्षीय निर्मला सचदेवा की मौत उपचार के दौरान मेकाज में हो गई। उन्होंने अपनी बीमारी के हालात में ही अपने शरीर को मेडिकल स्टडी के लिए दान करने की घोषणा कर दी थी। उनके इ\\\'छा अनुरूप सुबह उनकी मौत के बाद शव को मेडिकल कॉलेज को सौंप दिया गया है। निर्मला मेडिकल कॉलेज में तैनात डाक्टर देवेंद्र सचदेवा की मां हैं। उनकी आंखों को भी सुरक्षित रख लिया गया है। इसे ऐसे जरूरतमंद व्यक्ति को दिया जाएगा जो दुनिया देखने में सक्षम न हो। मेकाज के अधिकृत पीआरओ डॉ. केएल आजाद ने बताया कि निर्मला जैसे लोग बहुत कम होते हैं।
उन्होंने बताया कि उनके शव के माध्यम से कई छात्र अपनी आगे की पढ़ाई कर पाएंगे। उनके शव को एनाटमी विभाग को सौंप दिया गया है। वहीं उनकी आंखों को नेत्र बैंक में रखा गया है। उन्होंने बताया कि बस्तर में देहदान का यह दूसरा मामला है। कुछ दिनों पूर्व शहर के गोरे लाल झा का देह एनॉटामी विभाग को सौंपा गया था। वे पहले शख्स थे। जिन्होंने मेकाज को अपना देह दिया था। डॉ आजाद ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति अपना देह दान करने का इ\\\'छुक हो तो वह उनके मोबाइल नंबर 9827985728 पर संपर्क कर सकते हैं।