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रा\'य को पुरस्कार लेकिन जिले में मजदूर ही नहीं निकल रहे
भास्कर न्यूज - जगदलपुर
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में जहां रा\\\'य को बेहतर कार्य के लिए पुरस्कृत किए जाने की तैयारी की जा रही है, वहीं बस्तर संभाग में अधिकतर जिलों की हालत खस्ता है।
छत्तीसगढ़ को कन्जर्वेन्स श्रेणी में मनरेगा की राशि तथा अन्य विकास विभागों की योजनाओं को मिलाकर ग्रामीणों को अधिक से अधिक संख्या में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए यह पुरस्कार दिया जा रहा है। महात्मा गांधी नरेगा के वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष खत्म होने में सिर्फ दो ही महीने रह गए हैं, लेकिन बस्तर जिले में 1425 परिवार को ही 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जा सका है। जबकि यहां सवा लाख परिवारों को जॉब कार्ड जारी किए गए हैं। इनमें से भी सिर्फ 49 हजार 39 परिवारों ने रोजगार की मांग की है। दंतेवाड़ा में मनरेगा के तहत जॉब मांगने वाले परिवारों की संख्या भले ही 23 हजार हो, लेकिन इनमें से 328 परिवार ही ऐसे हैं जिन्हें 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जा सका है। सुकमा में रोजगार की मांग करने वाले परिवारों की संख्या की तुलना में 92 फीसदी परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। कम संख्या में परिवारों का पंजीयन होने के बाद भी यहां 757 परिवारों को यहां 100 दिन का रोजगार उपलब्ध हो सका है।