- Hindi News
- वीरता पुरस्कार विजेता पान मसाला बेचकर दिन गुजार रहा
वीरता पुरस्कार विजेता पान मसाला बेचकर दिन गुजार रहा
अदम्य साहस और सूझबूझ एवं वीरतापूर्ण कृत्य के लिए २००४ के गणतंत्र दिवस पर रा\\\'यपाल से प्रमाण पत्र पाया, लेकिन एक अदद नौकरी के लिए तरस रहा युवक।
सत्यनारायण पाठक . जगदलपुर
घटना बारह साल पहले १६ सितंबर २००२ की है, १२ वर्षीय नोहर किशोर दोपहर को घर पर था, गैस खत्म हो जाने से उसकी मां सतरूपा साहू मिट्टी तेल के स्टोव पर भोजन तैयार करने लगी। इस बीच वह उठी लेकिन उसकी साड़ी स्टोव में फंस गई और स्टोव उलट गया इसके साथ ही आग भड़क उठी।
चिल्लाने की आवाज सुनकर जब नोहर कमरे में पहुंचा पूरे घर में आग लगी थी, जिसके बीच उसकी मां जल रही थी। उसने अपनी जान की परवाह किए बिना आग में कूद पड़ा और अपनी मां को तो बचा लिया, लेकिन आग की चपेट में आकर उसकी पैंट पैर से चिपक गई थी जिससे उसका दाहिना पांव बुरी तरह जल गया। किसी तरह पानी की टंकी में कूदकर उसने जान बचाई। उसे महारानी हास्पिटल में भर्ती कराया गया, लेकिन जख्म गंभीर होने से उसे पांच दिनों बाद भिलाई सेक्टर ९ हास्पिटल के लिए रिफर कर दिया गया। लंबी सर्जरी और इलाज के बाद वह अब चल लेता है, लेकिन भागने-दौडऩे में वह अब भी अक्षम है।
पान मसाला और टॉफी बेच रहा : नोहर अब २४ साल का हो चुका है, जीवन की गाड़ी चलाने के लिए वह किराने की एजेंसी में मार्केटिंग का काम कर रहा है। शहर से लेकर आसपास के गांवों तक दुकानों में वह पान मसाला और टॉफी पहुंचा आता है। कुछ कमीशन पर तो कुछ महीने की पगार के तौर पर उसकी कमाई हो जाती है। चर्चा के दौरान उसे इस बात का बराबर मलाल रहा कि किशोर होने के पहले ही उसे वीरता का पुरस्कार तो मिला, लेकिन अब जब वह नौकरी के लायक हो गया है, तो उसे इस प्रमाण पत्र का कोई लाभ नहीं मिल रहा है।