आधी रात दवा मिलती है न डाक्टर
ञ्च भास्कर ने जांची रात दो बजे हास्पिटल की व्यवस्था। मरीज कराहते हैं पर नहीं मिलता इलाज करने वाला।
ञ्च पेपर टेप से लेकर कैनुला के लिए भी रात में लगानी पड़ती है दौड़।
मो. इमरान नेवी - जगदलपुर
बस्तर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के बाद सरकार का दावा था कि यहां मरीजों को डाक्टर दवा और बेहतर उपचार मिलेगा पर सरकार के इस दावे की पोल हर रोज मेकाज में खुल रही है। यहां मरीजों को समय पर डाक्टर मिल रहे हैं और न ही दवा मिल पा रही है। सर्वाधिक परेशानी मरीजों को रात में उठानी पड़ती है। भास्कर की टीम हास्पिटल के फिमेल मेडिकल वार्ड, सर्जिकल, आर्थो व मेल मेडिकल, सर्जिकल एक, दो व तीन में रात दो बजे के बाद पहुंची तो पाया इस वार्ड में स्टाफ नर्सें रतजगा कर रही थीं। इनके साथ कुछ नर्सिंग की छात्राएं भी जाग रही थी।
वार्डों में पूछताछ करने पर पता चला कि रात में किसी मरीज की तबीयत बिगडऩे पर पहले नर्स इलाज के लिए इंटर्न को फोन करती हैं। डाक्टरी की पढ़ाई करने वाले इटर्न अपने स्तर पर मरीज को हैंडल करने का प्रयास करते हैं। जब उनसे बात नहीं बनती तो वे फोन पर कंसलटेंट से बात कर दोबारा उपचार की शुरूआत करते हैं। इस प्रोसिजर में करीब दो से चार घंटे बीत जाते हैं और रात में मरीज को डाक्टर उपलब्ध ही नहीं हो पाता है।
मेकाज के अधिकृत प्रवक्ता डॉ केएल आजाद ने बताया पेपर टेप व अन्य सामानों की खरीदी की जा रही है। रेसीडेंट डाक्टरों की कमी के कारण कुछ परेशानियां उठानी पड़ रही है। फिलहाल यहां कंसलटेंट डाक्टरों के भरोसे व्यवस्था चलाई जा रही है।