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गिट्टी-रेत की नई दर तय करेगा प्रशासन

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - जगदलपुर
रेत की खदानों पर नहीं हो सका निर्णय, लेकिन गिट्टी-रेत की दर तय करने दिए गए निर्देश। खनिज संचालक ने कहा कम से कम दर पर उपभोक्ता को मिलेगी निर्माण सामग्री।
बस्तर जिले में रेत की बंद खदानों के संबंध में पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिल सकी है। इसके बावजूद रेत का उत्खनन और विक्रय धड़ल्ले से किया जा रहा है। खनिज विभाग ने कुल १७ प्रकरण स्वीकृति के लिए भेजे हैं। अब अठारहवें प्रकरण को भेजने की तैयारी की जा रही है, लेकिन इनमें से किसी को भी स्वीकृति नहीं मिल सकी है। जिसके चलते रेत का सारा कारोबार माफिया चला रहे हैं और उपभोक्ताओं को मनमाना कीमत चुका कर रेत खरीदना पड़ रहा है।
सहजता से रेत उपलब्ध नहीं होने से भवन निर्माण से जुड़े लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चोरी-छिपे लाई गई रेत का भी रेट मनमाना लिया जा रहा है। निर्माण की लागत रेत के चक्कर में कई गुना बढ़ गई है।
शहर में इन दिनों चित्रकोट और बस्तर की ओर से धड़ल्ले से रेत लाया जा रहा है। प्रतिबंध के बाद से अब तक हजारों घनमीटर रेत का उत्खनन कर खपाया जा चुका है। भौमिकी तथा खनिकर्म के संचालक निर्मल खाखा ने पिछले दिनों संभाग भर के खनि अधिकारियों की बैठक लेकर इस पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
उन्होंने ग्राम पंचायतों से प्राप्त प्रस्ताव एवं माइनिंग प्लान तैयार करने को कहा। साथ ही ग्राम पंचायतों में छोटे-छोटे क्षेत्र के बजाय बड़े क्षेत्र में जो ५ हेक्टेयर से \\\'यादा और २५ हेक्टेयर तक होगी का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने को कहा गया है। जिससे शीघ्र ही पर्यावरण संबंधी क्लियरेंस मिल सके। संचालक ने पर्यावरणीय स्वीकृति के अभाव में बंद खदानों के प्रस्ताव भी फिर से भेजने के निर्देश दिए।
गिट्टी और रेत की वर्तमान दर के संबंध में सभी जिलों से जानकारी भी ली गई है। जिसमें दर की विभिन्नता पर नाराजगी जताते हुए इसमें एकरूपता लाने के प्रयास पर जोर दिया गया। जिससे कम से कम दर पर उपभोक्ताओं को गौण खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।