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नक्सलियों ने गर्भपात के लिए बनाया था दबाव
भास्कर न्यूज - राजनांदगांव
पहले तो रजामंदी से माओवादी नेताओं ने संगठन के दो नक्सलियों की शादी करा दी। इसके बाद नसबंदी कराने की बात लगातार कहने लगे। इसी बीच महिला नक्सली गर्भवती हो गई, इसका पता जब संगठन के नेताओं को चला तो वे गर्भपात कराने के लिए दोनों पर दबाव बनाने लगे।
नक्सलियों की कथनी और करनी में अंतर को देखकर नक्सली लाल साय, पत्नी कमला और पिता बहादुर ने बीएसएफ के अधिकारियों के समक्ष बुधवार को सरेंडर कर दिया। उनसे पूछताछ की जा रही है।
आत्मसमर्पण कर चुके दंपती ने बताया कि संगठन के नेता छोटे कैडरों पर काफी दबाव बनाते हैं। खासकर आंध्रप्रदेश के बड़े माओवादी नेता उनसे काफी सौतेला व्यवहार करते हैं। इस कारण छोटे कैडर काफी परेशान है, उनके साथ भी ऐसा ही हुआ। इसलिए उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि पूर्व में उनके साथियों ने राजनांदगांव में सरेंडर किया था।
बेहतर पुनर्वास नीति के चलते ही वे यहां आत्मसमर्पण कर रहे हैं। पुलिस प्रोफाइल के मुताबिक 17 से 18 माओवादी और संगठन में काम कर रहे हैं, जिन्हें मुख्यधारा से लाने का प्रयास किया जा रहा है।
बंदूक का ग्लैमर
ही कारण बना
नक्सली लाल साय ने बताया कि 2008 में वह कक्षा छठवीं में पड़ता था। उस समय ग्राम तुमरीसुर में नक्सली फुलो बाई और अन्य सदस्यों का आना-जाना था। उन्होंने घूमने-फिरने और बंदूक चलाने मिलेगा, इस तरह की बातें कर अपने साथ शामिल होने कहा। बंदूक लेकर चलना जैसी बातों से प्रभावित होकर लाल साय नक्सलियों के साथ निकल गया। इसके बाद मदनवाड़ा, औंधी एओएस, परतापुर दलम में भेज दिया गया। फिर 2013 में औंधी एओएस की सदस्य कमला से लाल साय की शादी करा दी गई।
दोनों को पल्लेमाड़ी एओएस में भेज दिया गया। नक्सली कमला ने बताया कि नाच-गाने के लिए नक्सलियों ने अपने साथ रखा और मदनवाड़ा दलम में भेज दिया गया। वहां डेढ़ साल के बाद औंधी एओएस में कमला को भेज दिया गया।
आत्मसमर्पित नक्सली दंपती ने बताया