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जनदर्शन नहीं लगने के कारण भटक रहे ग्रामीण
भास्कर न्यूज - बालोद
चुनाव होने के पहले आचार संहिता लगी और जिले में कलेक्टर जनदर्शन पर विराम लग गया। अब चुनाव के बाद भी जनदर्शन शुरू नहीं हो पाया। चुनाव से पहले शासन ने सभी विभाग के अधिकारियों को पुराने मामले निपटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन कई विभाग ऐसे हैं जहां चुनाव के बाद भी मामले पेंडिंग रह गए। वजह जो भी हो अधिकारियों की व्यस्तता अपने दफ्तर में कम चुनावी ड्यूटी में ज्यादा रही या फिर अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। दो माह पहले आवेदन दिए आवेदक आज भी इंतजार में है कि उनके आवेदन पर क्या कार्रवाई हो रही है।
परेशान हैं आवेदक
कलेक्टोरेट में आए दिन बैठक होती है, लंबित आवेदनों पर समीक्षा होती है, लेकिन कार्रवाई शून्य दिख रही है। अब तक जिले के 59 विभागों को मिलाकर जनदर्शन के 586 आवेदन लंबित है। जनदर्शन में कुल 5511 आवेदन आए थे। जिसमें चुनाव से पहले तक 4925 आवेदन निराकृत हो पाए थे।
आचार संहिता लागू होने के दो महीने पहले मिले थे आवेदन
कलेक्टरोरेट में जनदर्शन नहीं होने से पांच सौ से अधिक आवेदनों का निराकरण नहीं हुआ है।
जल्द होगा निराकरण
॥ सभी विभागों को जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर करने के निर्देश दिए गए हैं।ञ्जञ्ज अमृत खलको, कलेक्टर, बालोद
परेशानी - हर सोमवार को दूरदराज से कलेक्टोरेट आ रहे हैं ग्रामीण
विभाग दफ्. लंबित आवेदन
सहायक आयुक्त 26
आदिवासीविकास विभाग
विद्युत विभाग बालोद 44
खाद्य विभाग बालोद 43
नगर पंचायत गुरुर 19
डीआरडीए बालोद 37
विभाग दफ्. लंबित आवेदन
पीएमजीएसवाई बालोद 28
जनपद पंचायत बालोद 62
एसडीएम ((राजस्व))
डौंडीलोहारा 41
एसडीएम गुंडरदेही 22
तहसीलदार बालोद 41
विभाग दफ्. लंबित आवेदन
तहसीलदार डौंडी 17
उप संचालक समाज एवं 23
पंचायत कल्याण बालोद
वन विभाग बालोद 23
डीईओ बालोद 15
कलेक्टर आफिस 13
प्रमुख विभागों में लंबित आवेदनों की स्थिति
फिर से जनदर्शन शुरू करने सरकारी आदेश का इंतजार
आचार संहिता के दौरान स्थगित जनदर्शन अब तक शुरू नहीं हुआ। आचार संहिता हटने के बाद से चार सोमवार गुजर गए हैं। अधिकारी शासन के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। वहीं दूर-दूर से ग्रामीण आज भी अपनी समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। ये आवेदक अक्सर सोमवार के दिन ही जनदर्शन समझकर कलेक्टर से फरियाद करने आ रहे हैं, लेकिन अफसोस है कि उनके आवेदन जनदर्शन में नहीं जुड़ रहे। आवेदन ऑनलाइन न होकर ऑफलाइन अधिकारियों अधिकारियों के टेबल तक कार्रवाई के लिए भेजा जा रहा है। सीधे प्राप्त ऐसे आवेदनों पर अधिकारी भी जनदर्शन की तरह गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। वहीं एक बात ये भी है कि जो अधिकारी अपना मूल दफ्तर छोड़कर कलेक्टोरेट कार्यों में ज्यादा व्यस्त रहते है। उन्हीं के विभाग में ज्यादा आवेदन लंबित है। उदाहरण है डौंडीलोहारा राजस्व विभाग 41 आवेदन व खाद्य विभाग में 43 आवेदन लंबित है। यही हाल विद्युत विभाग में 44 आवेदन लंबित है। आवेदकों की मंशा होती है कि वे तहसील स्तर के बजाए सीधे जिला कार्यालय में जाएंगे तो उनकी मांगों पर त्वरित कार्रवाई होगी, लेकिन आवेदकों की यह मंशा पूरी नहीं हो रही। एक तरफ पुराने जनदर्शन के आवेदन लंबित है, उस पर सोमवार व रोज आ रहे आवेदनों का ढेर विभाग के टेबल पर लगता जा रहा है।
ञ्चचुनाव के बाद भी जनदर्शन के 586 आवेदन लंबित।
ञ्चअब तक शुरू नहीं हुआ जनदर्शन। निराकरण के इंतजार में आवेदक।