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जगतपति के लिए तिलक धारण करें पुरुष : बाल योगेश्वर

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बेमेतरा
ग्राम बीजाभाट में 108 कुंडीय महायज्ञ के छठवें दिन निरंतर आहुतियों के साथ ज्ञान की गंगा बह रही है। बाल योगेश्वर महाराज ने सत्संग प्रवचन की शृंखला में कहा कि भारतीय सभ्यता व संस्कृति को बनाए रखें। उन्होंने आज के युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि पाश्चात्य सभ्यता का जिस तरह से अंधानुकरण हो रहा है, ये सुरसा राक्षस की तरह समाज में फैलता ही जा रहा है।
भारतीय समाज के लोग पाश्चात्य सभ्यता में ढलने की आदत बना रहे हैं। लोगों का बोलचाल उन्हीं की तरह हो रहा है। खान-पान में भी बदलाव आ रहा है। पहनावा भी पाश्चात्य संस्कृति की तरह हो गया है। लोग धोती-कुर्ता पहनना, चोटी रखना व तिलक लगाना बंद कर दिए हैं। आज पाश्चात्य संस्कृति 5000 वर्ष पुरानी भारतीय संस्कृति को चुनौती दे रही है। लोगों को अपनी भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए पूरा प्रयास करना चाहिए। जिस प्रकार पतिव्रता स्त्री अपने पति के लिए तिलक धारण करती है उसी प्रकार पुरुषों को भी जगतपति के लिए तिलक लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य को सुख और दुख दोनों ही परिस्थितियों में शांत रहकर सभ्यतापूर्ण जीवन का निर्वाह करना चाहिए।



ग्राम बीजाभाठ में 108 कुंडीय महायज्ञ में शामिल होने पहुंचे लोग।

सुख ही दुख का असली कारण

बेमेतरा - श्रीरामचरित मानस महायज्ञ के पांचवें दिन श्रीराम बालक दास ने जीवन के तीन सूत्र बताए। उन्होंने कहा कि सुख ही दुख का कारण है। दुखियों की सेवा से ही मानव समाज का कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि जीवन का सार अंश ही मनुष्य मात्र की मुक्ति दिलाता है। जिसे अपने दिव्य ज्ञान से प्राप्त किया जा सकता है। तन, मन व धन की शुद्धता से मानव मात्र को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। व्यक्ति की अंतरात्मा में दया व प्रेम भाव का प्रादुर्भाव होता है। इससे जन कल्याण होता है और विश्व कल्याण की दिशा तय होता है। मानव शांति के लिए सभी प्राणियों के प्रति प्रेम व दया की भावना जरूरी है।